साल 2019-20 बैच की जांच चल रही है। इस बैच में भी कई फर्जी छात्रों के प्रवेश लेने की आशंका है। मामले के पकड़ में आने के बाद विश्वविद्यालय में हड़कंप की स्थिति है। विवि के कुछ लोगों की मिलीभगत की बात भी सामने आ रही है। इनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।
ऐसे पकड़ा गया फर्जीवाड़ा
कंप्यूटर साइंस विभाग की एक छात्रा की संदिग्ध गतिविधियों का संज्ञान लेते हुए एक प्रोफेसर ने उससे प्रवेश का आवंटन पत्र मांगा। उसने जो पत्र दिया, वह तो फर्जी था ही, प्रवेश के लिए जमा की गई फीस की रसीद भी फर्जी थी। प्रोफेसर ने जब यह जानकारी विश्वविद्यालय प्रशासन को दी, तो कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने सभी ब्रांच के प्रवेश की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया। जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। शुल्क और आवंटन पत्र के मिलान में पाया गया कि कई छात्रों का प्रवेश सूची से भिन्न नामों से है।