गोरखपुर जिला महिला अस्पताल में इनदिनों रात में पैथोलॉजी की व्यवस्था ठीक नहीं है। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों की कोई भी जांच यहां नहीं हो पा रही है। मजबूरी में मरीजों को निजी पैथोलॉजी में ही जांच करानी पड़ रही है।
महिला अस्पताल में इमरजेंसी की सुविधा मेटरनिटी विंग से दी जाती है। इस विंग में 24 घंटे पैथोलॉजी की सुविधा देने के लिए छह लैब टेक्नीशियन की ड्यूटी लगाई गई है। स्वास्थ्य विभाग ने इनमें से तीन की ड्यूटी कोरोना जांच में लगा दी है। अब अस्पताल में सिर्फ तीन लैब टेक्नीशियन ही मौजूद हैं। दोपहर दो से रात 10 बजे तक एक टेक्नीशियन की ड्यूटी रहती है। रात 10 बजे से सुबह आठ बजे तक कोई टेक्नीशियन नहीं रहता है।
लौट रहे हैं मरीज
महिला अस्पताल में रात में ज्यादातर इमरजेंसी केस आते हैं। महिलाओं को तत्काल ऑपरेशन या लेबर रूम में भर्ती करने की जरूरत पड़ती है। इसके लिए खून की जांच के साथ ही एचआईवी व हेपेटाइटिस की जांच भी बेहद जरूरी होती है। रैपिड कार्ड की मदद से यह जांच सिर्फ 15-20 मिनट में हो सकती है। इसके लिए लैब टेक्नीशियन का होना बेहद जरूरी है। अस्पताल में टेक्नीशियन न होने से तीमारदारों को मरीजों को लेकर बाहर जाना पड़ रहा है। कुछ प्राइवेट पैथोलॉजी के बिचौलिए शाम होते ही कैंपस में घूमना शुरू कर दे रहे हैं।
महिला अस्पताल एसआईसी माला कुमारी सिन्हा ने कहा कि यह सही है कि तीन टेक्नीशियन कोरोना जांच में ड्यूटी कर रहे हैं। इमरजेंसी में ऑनकॉल लैब टेक्नीशियन को बुलाया जा रहा है। किसी भी मरीज को लौटाया नहीं जा रहा है।