गोरखपुर में 1968 में स्थापित फर्टिलाइजर कारपोरेशन ऑफ इंडिया के खाद कारखाने को 1990 में हुए एक हादसे के बाद बंद कर दिया गया। एक बार यहां की मशीनें शांत हुईं तो तरक्की से जुड़ी उनकी आवाज को दोबारा सुनने की दिलचस्पी सरकारों ने नहीं दिखाई। 1998 में गोरखपुर से पहली बार सांसद बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने संसद के हर सत्र में खाद कारखाने को चलाने या इसके स्थान पर नए प्लांट के लिए आवाज बुलंद की।
2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ की इस मांग पर संजीदगी दिखाई और 22 जुलाई 2016 को नए खाद कारखाने का शिलान्यास कर पूर्वी उत्तर प्रदेश को बड़ी सौगात दी। मार्च 2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद खाद कारखाने के निर्माण में किसी तरह की बाधा ही नहीं रह गई। खास बात यह भी है कि यहां पर्यावरण अनुकूल प्राकृतिक गैस आधारित प्लांट लगाया गया है।
एक नजर में
- शिलान्यास - 22 जुलाई 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों
- संचालनकर्ता : हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड
- कार्यदायी संस्था - टोयो जापान
- कुल बजट - करीब 8000 करोड़ रुपये
- यूरिया प्रकार - नीम कोटेड
- प्रीलिंग टावर - 149.5 मीटर ऊंचा
- रबर डैम का बजट- 30 करोड़
- रोजगार प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष - 10 हजार
- रोजाना यूरिया उत्पादन - 3850 मीट्रिक टन
- रोजाना लिक्विड अमोनिया उत्पादन -2200 मीट्रिक टन