ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, सोमवार को छठ महापर्व का अंतिम दिन है। इस दिन धनिष्ठा नक्षत्र, ध्रुव योग और शुभ नामक नामक औदायिक योग है। बताया कि सूर्य को परम ब्रह्म और माया षष्ठी को परा प्रकृति की संज्ञा दी जाती है। इस महापर्व पर समस्त देवगणों की अनुकंपा व्रतियों को प्राप्त होगी। इस दिन व्रती ब्रह्म मुहूर्त में अर्घ्य सामग्री लेकर जलाशय में खड़ी होकर अरुणोदय की प्रतीक्षा करेंगी। जैसे ही क्षितिज पर अरुणिमा दिखाई देगी, वे मंत्रोचार के साथ भगवान सूर्य को अर्घ्य देंगी। इसके बाद व्रत का पारण करेंगी।
कार्तिक शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर शनिवार को महानगर के विभिन्न स्थानों पर छठ माता की प्रतिमाओं की स्थापना भक्तिभाव से की गई। सायंकाल पूजा-अर्चना कर प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा की गई। पट खुलने के बाद दर्शन-पूजन के लिए भक्तों की भीड़ रही। छठ पूजा के बाद प्रतिमाओं को राप्ती नदी के राजघाट तट पर बने कृत्रिम तालाबों में विसर्जित कर दिया जाएगा।
छठ पूजा के लिए महानगर के असुरन चौक, विष्णुपुरम, बशारतपुर, राजघाट, गोरखनाथ, मानसरोवर, सूर्यकुंड, डोमिनगढ़, रामगढ़ताल, विष्णु मंदिर, राप्तीनगर, रुस्तमपुर, सहारा इस्टेट और खरैया पोखरा के साथ तमाम मोहल्लों में अस्थायी घाट बनाए गए हैं
छठ पूजन सामग्रियों की खरीदारी के लिए बाजारों में शनिवार देर रात तक खरीदारों की भीड़ उमड़ी रही। फल, सब्जी, दउरा, सुपली, मिट्टी के बर्तन आदि की दुकानें खरीदारों की भीड़ से पूरे दिन गुलजार रहीं। पर्याप्त मात्रा में पूजन सामग्री होने के बावजूद दुकानदारों ने शनिवार की तुलना में हर सामान महंगा बेचा। व्यापारी सुनील ने बताया कि बाजार में छठ पर्व के लिए बिहार के बिहार और मऊ से सूप, दउरा, कश्मीर का सेब, नागपुर का संतरा, कोलकाता का नारियल, नासिक का अंगूर, हिमाचल प्रदेश का रामफल, साउथ कोरिया का आम और पुणे का अमरूद मौजूद है।
रविवार: सायंकाल पांच बजकर 22 मिनट पर अस्तांचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।
सोमवार: सुबह छह बजकर 39 मिनट पर सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।
पिछले 40 सालों से छठ का व्रत कर रही हूं। व्रत के नियम तो पहले जैसे ही हैं, लेकिन अब छठ पर्व पर शोर-शराबा ज्यादा होता है। पहले की तुलना में घाटों पर भीड़ भी ज्यादा होती है।- उषा मद्धेशिया,पादरी बाजार
20 सालों से व्रत कर रही हूं। पहले पूजन सामग्रियों को खरीदने में दिक्कत होती थी, सामानों के लिए भटकना पड़ता था, लेकिन अब हर सामान आसानी से मिल जाता है। व्रत करने में भी सुविधा है।-अहिल्या शर्मा,भगत चौराहा
पांच साल से व्रत कर रही हूं। संतान की मनोकामना के लिए व्रत का संकल्प लिया था। मां ने संतान देकर गोद भर दी। मन्नत पूरी होने के बाद से छठ व्रत करना शुरू कर दिया था।-दीपा शुक्ला,कालीबाड़ी
छठ माता सभी मनोकामनाओं को पूरा करती हैं। आज तक जो भी माता से मांगा, वह मिला है। शादी के बाद से छठ का व्रत कर रही हूं, आगे भी सिलसिला जारी रहेगा।-बबिता मद्धेशिया,पादरी बाजार