उप्र मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत कोरोना में अनाथ हुए शून्य से 18 साल के बच्चों के वैध संरक्षक के बैंक खाते में 4000 रूपये प्रतिमाह दिए जाएंगे । योजना के तहत चिन्हित बालिकाओं के शादी के योग्य होने पर शादी के लिए 1.01 लाख (एक लाख एक हजार रूपये) मिलेंगे। श्रेणी में आने वाले कक्षा-9 या इससे ऊपर की कक्षा में अथवा व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त कर रहे 18 साल तक के बच्चों को टैबलेट या लैपटॉप की सुविधा मिलेगी।
हाथ में स्वीकृति पत्र, आंखों में आंसू, जुबां पर सीएम के प्रति आभार
जिले में जो 176 बच्चें कोरोना की वजह से अनाथ हुए उनमें छह को छोड़ बाकी सभी में से किसी के पिता नहीं रहे तो किसी की मां। कार्यक्रम में ऐसे ही कुछ बच्चों के अभिभावकों को भी बुलाया गया था। इनमें महिलाओं की संख्या अधिक रही। एनेक्सी भवन में जनप्रतिनिधियों, अफसरों ने उन्हें स्वीकृति पत्र वितरित करना शुरू किया तो कई की आंखों से आंसू छलक पड़े। सभी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि उनकी वजह से उनके बच्चों को भविष्य सुरक्षित हो गया। वे पढ़-लिख लेंगे।
लाभार्थी विमलावती ने कहा कि उनकी पांच बेटियां और एक बेटा है। अक्तूबर महीने में कोरोना से पीड़ित उनके पति की निजी अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। घर, उनकी ही कमाई से चलता था। पति के गुजरने के बाद इनके भविष्य को लेकर वह सर्वाधिक फिक्रमंद थी। मगर बाल सेवा योजना में बच्चों की पढ़ाई लिखाई और बेटियों की शादी पर सरकार एक लाख रुपये देगी। यह खबर सुनकर उन्होंने काफी राहत महसूस की।
कहती है कि सरकार उन्हें भी काम दिलाएगी तो वे खुशी -खुशी करेंगी ताकि बच्चे और ठीक से पढ़ लिख सके। पति को याद कर भावुक हो गईं सरिता देवी, रश्मी सिंह और इश्रावती देवी की भी पीड़ा विमलावती जैसी ही है। सभी को अपने बच्चों की ही चिंता सता रही थी। उनका कहना था कि दो वक्त की रोटी का इंतजाम तो वे किसी तरह मेहनत-मजदूरी से कर लेंगी मगर बच्चों की पढ़ाई और उनकी परवरिश की चिंता सता रही थी। सरकार ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया तो अब राहत की उम्मीद जगी है।