डॉ. नरेंद्र देव ने कहा कि छात्र की रुचि और सीखने की क्षमता को देखते हुए उसे विभागीय कार्यों में शामिल किया जाएगा। इंटर्नशिप के दौरान वह अन्य जूनियर छात्रों के साथ अस्पताल की विभिन्न जिम्मेदारियां निभाएगा। कॉलेज से जुड़े लोगों के अनुसार छात्र अंतिम वर्ष में कई बार फेल हुआ लेकिन हार नहीं मानी। लगातार असफलताओं के बावजूद उसने पढ़ाई जारी रखी और पेपर देता रहा। आखिरकार वह सफल भी हो गया।
मेडिकल कॉलेज के कई शिक्षक और छात्र इसे संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास की मिसाल मान रहे हैं। डॉ. नरेंद्र देव ने बताया कि अब छात्र डॉक्टर बनने की अंतिम प्रक्रिया पूरी करते हुए अस्पताल में मरीजों की सेवा से जुड़ा अनुभव हासिल करेगा।