कोरोना संक्रमण की वजह से कुशीनगर जिले में अब तक 156 लोगों की जान चली गई है। इन सबके परिवार के लोग अपनों के असमय चले जाने से गमजदा हैं। लेकिन सबसे अधिक चिंताजनक हालत उन 45 बच्चों की है, जिन्होंने इस महामारी में अपने माता-पिता या दोनों में से किसी को एक को खो दिया है। दो से लेकर 15 साल तक इन बच्चों के सामने पढ़ाई-लिखाई की बात कौन करे, दो वक्त के भोजन का भी संकट बना हुआ है।
तुर्कपट्टी थाना क्षेत्र के महुअवा गांव के एक ही परिवार के तीन बच्चों के सिर से माता-पिता दोनों का साया उठ गया है। हाटा कोतवाली क्षेत्र के पिपरही गांव में चार बच्चे भी अनाथ हो गए हैं। पडरौना कोतवाली थाना क्षेत्र के जंगल जगदीशपुर गांव में भी दो बच्चों का अब कोई सहारा नहीं है।
अहरौली बाजार थाना क्षेत्र के सिहुलिया अकटहियां गांव में एक बच्चे के माता-पिता की मौत हो गई है। कोरोना संक्रमण के दौरान अपने माता-पिता को खो देने वाले इन बच्चों की उम्र दो वर्ष से 15 वर्ष के बीच है। कुछ तो अभी ठीक से पापा बोलने भी नहीं सीख पाए थे, तो कुछ ऐसे थे जिनके मां-बाप ने होनहार बेटे को लेकर बड़ा सपना देखा होगा। लेकिन अब इन बच्चों के सामने भोजन से लेकर पढ़ाई तक का संकट छाया है। रिश्तेदारों और गांव के लोगों के रहम पर इनका पालन-पोषण हो रहा है।
जिला प्रोवेशन अधिकारी विजय कुमार पांडेय ने बताया कि कोरोना संक्रमण की वजह से अनाथ हुए बच्चों के भरण-पोषण की संपूर्ण जिम्मेदारी सरकार उठाएगी। इसके लिए सूचना एकत्रित की जा रही है। अभी तक जिले में कुल 45 ऐसे बच्चों की जानकारी हुई है, जिनके अभिभावकों की मौत हो चुकी है। इसमें से 10 बच्चे ऐसे हैं, जिनके माता-पिता दोनों की मौत हुई है। जबकि 35 बच्चों में से माता या पिता में से किसी एक की मौत हुई है। अभी बच्चों के बारे में जानकारी जुटाने का कार्य चल रहा है। इसकी सूचना शासन को भेजी जाएगी।