कलाकार - साकिब सलीम , रणवीर शौरी, तिगमांशू धूलिया, रवि किशन, आहना कुमरा। निर्देशक- भाव धूलिया
ओटीटी - जी5
कहने को यह सीरीज यह सत्य घटनाओं से प्रेरित है। लेकिन, सत्य के नाम पर इस सीरीज में कुछ नहीं है। गाड़ियों पर 90 के दशक में किस तरह की नंबर प्लेट होती है, इतनी सी सामान्य जानकारी अगर वेब सीरीज लिखने वालों को नहीं है तो फिर बाकी सीरीज सत्य से कितनी प्रेरित होगी, अंदाजा ही लगाया जा सकता है।
एक दबंग ब्राह्णण नेता की हत्या के बदले में मुख्यमंत्री को मारने की सुपारी लेने वाले मामखोर के शुक्ला ने अपनी सिस्टर को छेड़ने वाले का दिन दहाड़े मर्डर किया और बन गया पूरब का पहला डॉन। बैंकॉक से लेकर बिहार, दिल्ली और यूपी तक आतंक मचाने वाला कम उम्र का इस बदमाश को एके 47 मिलने की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं रही है। लेकिन, सीरीज बनाने वालों को बस एक नाम मिला और एक अधकचरी रिसर्च पर एक बेतुकी कहानी लिख डाली - रंगबाज। यूपी का रंगबाज क्या होता है ये समझने के लिए साकिब सलीम को कुछ दिन यूपी के गोरखपुर, इलाहाबाद या लखनऊ में गुजारने चाहिए।
शुक्ला की फोटो को लेकर एसटीएफ ने तब कितनी माथापच्ची की थी, ये भी सीरीज बनाने वालों को पता नहीं है। शुक्ला अपनी गर्लफ्रेंड से फोन पर लंबा बतियाने का शौकीन जरूर था लेकिन फोन पर जिस तरह की बातें करते सीरीज में उसे दिखाया गया है, ऐसा तब के उषाफोन की सर्विलांस करने वालों ने कभी नहीं सुना। शुक्ला की रॉबिनहु़ड वाली इमेज भी गायब है। रणवीर शौरी कहीं से भी आईपीएस अफसर सा रुतबा नहीं गांठ पाते हैं और तिगमांशु धूलिया डायरेक्टर के तौर पर तो चुक ही रहे हैं, ऐसी ऐक्टिंग करके अपना नाम और खराब कर रहे हैं। आहना कुमरा और रवि किशन की कास्टिंग भी मिसफिट है।
सैक्रेड गेम्स ने नेटफ्लिक्स की दुकान भारत में चला दी। प्राइम वीडियो को मिर्जापुर चर्चा दिला रहा है। लेकिन, जी5 के लिए रंगबाज उतना फायदेमंद होता दिखती नहीं।