बादशाह ने बताया कि इस 20 पीस सिम्फनी ऑर्केस्ट्रा ग्रुप के सदस्यों को स्वर्गीय लता मंगेशकर के साथ वर्ल्ड टूर पर जाने का सौभाग्य मिला था। इस ग्रुप के सदस्य अरविंद हल्दीपुर ने बताया, "जब मैं पहली बार लता दीदी की रिकॉर्डिंग के लिए गया था, तो उस समय हृदयनाथ मंगेशकर 'जैत रे जैत' नाम की मराठी फिल्म के लिए रिकॉर्डिंग कर रहे थे। इस फिल्म में एक गाना था, जिसके लिए थोड़ा फास्ट संगीत देना था। मैंने एक पीस बजाया और उस समय लता दीदी भी वहां मौजूद थीं। उन्होंने अपना चश्मा नीचे करके मुझे देखा और कुछ देर बाद मेरे पास एक को-ऑर्डिनेटर आया और मुझसे कहा, 'मुझे आपका पासपोर्ट चाहिए।' जब मैंने पूछा क्यों? तो उन्होंने कहा, 'आपको दीदी (लता) के साथ यात्रा करना होगा।' तो यह दीदी के साथ यात्रा करने का मेरा पहला अनुभव था। यह कार्यक्रम साल 1978 में मॉस्को में हुआ था।
इशिता ने इस ऑर्केस्ट्रा ग्रुप के साथ 'सत्यम शिवम सुंदरम' गाने पर परफॉर्म किया, जिसे देखकर सभी की आंखें भर आईं। इशिता की परफॉर्मेंस पर उन्हें बधाई देते हुए बादशाह ने कहा, "आप इस ऑर्केस्ट्रा को डिजर्व करती हैं और ये आपको डिजर्व करते हैं। अगर सुबह-सुबह यह आवाज सुनकर कोई सोकर उठे ना, उसका दिन खराब ही नहीं जा सकता। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद इशिता, मेरी ओर से आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं!" आगे बादशाह ने एक छोटी-सी दिल छू लेने वाली कविता भी सुनाई, जो उन्होंने लता जी के लिए लिखी थी।
अपनी परफॉर्मेंस के बारे में बात करते हुए इशिता ने कहा, "इस मेहरबानी के लिए मैं बादशाह सर का जितना शुक्रिया अदा करूं, उतना कम है। 20 पीस सिम्फनी ऑर्केस्ट्रा के साथ परफॉर्म करना बड़ा सुखद अनुभव था, जिन्होंने लता मंगेशकर जी के साथ यात्रा की और दुनिया भर में परफॉर्म किया। यह मेरे लिए एक यादगार अनुभव होने वाला है और यह हमेशा मेरी यादों में रहेगा! मैं जजेस की भी आभारी हूं, जिन्होंने मुझे छोटी लता का टाइटल दिया है। यह वाकई एक बड़ा सम्मान है। लता मंगेशकर जी एक संस्थान हैं और वो हर भारतीय को, खासतौर पर मुझे प्रेरणा देती रहेंगी।"