एक भाभी सिर्फ घर का दरवाजा ही नहीं, दिल खोलकर अपनी ननद का स्वागत कर रही है। एक ननद की आंखों में भाभी के इस अपनेपन से खुशी के आंसू हैं। ननद-भाभी के रिश्ते की इस नई केमिस्ट्री को लेकर आ रहा है स्टार प्लस।
हाल ही में स्टार ने अपना नया शो 'एक ननद की खुशियों की चाबी-मेरी भाभी' लॉन्च किया है। सहेलियों, सास-बहू, मां-बेटी से अलग यह शो ननद और भाभी के रिश्ते को छोटे परदे पर साकार करेगा।
इस सीरियल में आपको सीरियल जैसा सब कुछ मिलेगा। मसलन, अच्छी स्टार कास्ट, एक लंबी कहानी, मेकअप और फैशन के नए ट्रेंड, घर-परिवार से जुड़े चटपटे और मजेदार किस्से, परेशानियां और उनसे जूझती सीरियल की मुख्य किरदार।
लेकिन आप सीरियल की दुनिया के दीवाने हैं, तो आप इन सबके बीच एक चीज जरूर मिस करेंगे और वो है एक मसालेदार वैम्प यानी खलनायिका की मौजूदगी।
शो की प्रोड्यूसर दीया के मुताबिक, ‘इस शो में कोई वैम्प नहीं है। असल जिंदगी में भी लोग बुरे नहीं होते, हालात उन्हें बुरा बना देते हैं। ऐसा ही कुछ इस शो में देखने को मिलेगा।’
शो की स्टारकास्ट में भी काफी सरप्राइज देखने को मिलेंगे। टेलीविजन की दुनिया के कुछ शाहकार और कुछ स्टार कलाकार इस शो में दिखेंगे।
इस शो के माध्यम से छोटे परदे के अमिताभ कहे जाने वाले कंवलजीत भी दर्शकों से मुखातिब होंगे।
शो में ननद की भूमिका निभा रही हैं कांची कौल। कांची कौल 'एक लड़की अनजानी सी' और 'मायका' शो से टीवी दर्शकों में चर्चित रह चुकी हैं।
कांची लगभग दो साल के ब्रेक के बाद इस शो से छोटे परदे पर वापसी कर रही हैं। शो में उनके किरदार का नाम श्रद्धा है। इसके साथ ही भाभी की भूमिका में हैं 'मुक्तिबंधन' वाली ईशा कंसारा।
सीरियल में सुप्रिया पिलगांवकर भी मुख्य भूमिका में हैं। शो की कहानी में भाभी घर-परिवार को संभालते हुए अपनी ननद को चुनौतियों से सामना करना भी सिखाती है और इस प्रक्रिया में दोनों दोस्त बन जाती हैं।
कंवलजीत सिंह शो के कॉन्सेप्ट को लेकर काफी उत्साहित हैं। काफी समय बाद टीवी पर वापसी कर रहे कंवलजीत कहते हैं कि, ‘तनाव भरी जिंदगी में रिश्तों के सकारात्मक पक्ष को दिखाने वाला यह सीरियल लोगों में अच्छाई की भावना जगाएगा।’
बात सही है। इस बात से शायद ही कोई इनकार करे कि एक सीरियल का दर्शकों पर काफी गहरा असर होता है। लेकिन कोई सीरियल अच्छा कैसे बनता है?
एक अच्छे सीरियल के पीछे सिर्फ किरदारों का अच्छा अभिनय ही नहीं, अच्छी कहानी और डायलॉग्स की भी काफी अहम भूमिका होती है।
‘मेरी भाभी’ शो में इस भूमिका को निभाने वाले एस. मनस्वी कहते हैं, ‘वक्त बेशक बहुत बदल गया है, लेकिन आज भी सीरियल की कहानी और डायलॉग्स लिखने के लिए पुराने क्लासिक नॉवेल पढ़ने से काफी मदद मिलती है। फिर चाहे आप प्रेमचंद या शरतचंद का कोई उपन्यास पढ़ लीजिए या श्रीलाल शुक्ल का रागदरबारी।’
सीरियल की लंबी खिंचती कहानियों के साथ तालमेल बैठाना एक लेखक के तौर पर काफी मुश्किल होता है। इस पर स्क्रिप्ट राइटर एस. मनस्वी की राय काफी दिलचस्प है।
वह कहते हैं, ‘सीरियल की कहानी लिखने के साथ सबसे बड़ी चुनौती ही यह है कि कहानी खत्म नहीं करनी है। इस चुनौती को निभा पाना एक लेखक के तौर पर काफी संतुष्टि देने वाला काम होता है।’
सास-बहू, पति-पत्नी, मां-बेटी और बहनों के रिश्ते को नए अंदाज में सामने लाने के बाद अब ननद और भाभी का यह रिश्ता छोटे परदे के दर्शकों को कितना संतुष्ट कर पाएगा, यह तो आने वाले कुछ हफ्तों में ही पता चलेगा।