अभिनेता पर आगे निशाना साधते हुए तनुश्री ने कहा, "नाना और दिलीप जैसे लोग साइकोपैथ हैं। उनका कोई इलाज नहीं है। मुझे इन समितियों की परवाह नहीं है। मुझे इस सिस्टम पर कोई भरोसा नहीं है।"
मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न पर हेमा कमेटी की रिपोर्ट आ गई है। इसी के साथ ही बॉलीवुड से लेकर टॉलीवुड तक में इस पर चर्चा भी होने लगी है। बॉलीवुड अभिनेत्री तनुश्री दत्ता ने हाल ही में जारी हेमा कमेटी की रिपोर्ट को बेकार बताया और कहा कि यौन उत्पीड़न पीड़ितों को फिल्म इंडस्ट्री में काम के अवसर न दिए जाने से कोई दया नहीं दिखती। तनुश्री ने अभिनेता नाना पाटेकर और दिलीप की भी आलोचना की, जिन पर पहले यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे।
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तनुश्री ने दी हेमा कमेटी की रिपोर्ट पर कड़ी प्रतिक्रिया
हेमा कमेटी रिपोर्ट पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए तनुश्री ने न्यूज 18 से कहा, "ये समितियां और रिपोर्ट, मैं इन्हें समझ नहीं पाती। मुझे लगता है कि ये बेकार हैं। 2017 में जो हुआ, उस पर रिपोर्ट बनाने में उन्हें सात साल लग गए? वैसे भी इस नई रिपोर्ट का क्या मतलब है? उन्हें बस आरोपियों को गिरफ्तार करना था और एक मजबूत कानून व्यवस्था लागू करनी थी।"
नाना और दिलीप को बताया साइकोपैथ
अभिनेता पर आगे निशाना साधते हुए तनुश्री ने कहा, "नाना और दिलीप जैसे लोग साइकोपैथ हैं। उनका कोई इलाज नहीं है। मुझे इन समितियों की परवाह नहीं है। मुझे इस सिस्टम पर कोई भरोसा नहीं है।" अभिनेत्री ने यह भी कहा कि उनका मानना है कि आरोपियों को दंडित करने के लिए कोई सही कार्य नहीं किया जा रहा है।
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मलयालम इंडस्ट्री में महिलाओं की असुरक्षा पर तनुश्री ने दिया जोर
इसके अलावा अभिनेत्री ने हेमा कमिटी रिपोर्ट में मलयालम इंडस्ट्री में महिलाओं की असुरक्षा पर जोर दिया। इस पर तनुश्री ने कहा कि, 'इस सारी कागजी कार्रवाई का पालन कौन करता है? जो लोग कानून तोड़ना चाहते हैं वे फिर भी इसे तोड़ेंगे। ये सभी शिकारी मानसिक रूप से बीमार हैं। उनका दिमाग ठीक नहीं है।'
क्या है हेमा कमेटी रिपोर्ट
हेमा रिपोर्ट को आधिकारिक तौर पर जस्टिस हेमा कमेटी रिपोर्ट के रूप में जाना जाता है। जस्टिस हेमा कमेटी का गठन 2017 में एक प्रमुख अभिनेत्री से जुड़े एक हाई-प्रोफाइल यौन उत्पीड़न मामले के मद्देनजर किया गया था। इस रिपोर्ट में महिलाओं के यौन उत्पीड़न, शोषण और दुर्व्यवहार की जरुरी डिटेल्स को एक्सपोज किया गया है। बता दें कि यह रिपोर्ट केरल सरकार ने अभी तक सार्वजनिक नहीं किया था, लेकिन आरटीआई अधिनियम के तहत सरकार को सोमवार (19 अगस्त 2024) को ये रिपोर्ट जारी करना पड़ा।