ये साल तमिल सिनेमा के लिए काफी दिलचस्प रहा है। साल की पहली छमाही और दूसरी छमाही के बीच काफी कुछ घटा है। पहली छमाही में जहां बॉक्स ऑफिस के लिए चीजें बहुत अच्छी नहीं रहीं। वहीं, दूसरी छमाही में थोड़ी बेहतरी देखने को मिली है। बॉक्स ऑफिस पर इस तरह की अनिश्चिचताओं का माहौल तामिलनाडु के सिनेमाघरों को मालिकों को रास नहीं आ रहा है। वो हर सप्ताह इस तरह के चढ़ाव-उतराव को लेकर काफी परेशान हैं, जिसे लेकर उन्होंने अपनी चिंताओं को साझा किया है।
तमिलनाडु थिएटर ओनर्स एसोसिएशन ने बुलाई थी बैठक
हाल में ही तमिलनाडु थिएटर ओनर्स एसोसिएशन द्वारा एक बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक के सदस्यों ने एक बयान जारी कर राज्य सरकार के साथ अपनी गंभीर चिंताओं को साझा किया है। इन चिंताओं में ओटीटी को लेकर भी राय जाहिर की गई है, जिसमें थिएटर और ओटीटी रिलीज के बीच आठ सप्ताह की अवधि शामिल है। एसोसिएशन द्वारा व्यक्त किए गए कुछ सुझावों में गतिशील टिकट मूल्य निर्धारण, शो की संख्या में वृद्धि और देश भर में तमिल फिल्मों के शो को नियमित करना शामिल है। एसोसिएशन ने गतिशील टिकट दर 250 रुपये + टैक्स (मल्टीप्लेक्स), 200 रुपये + टैक्स (एसी थिएटर) और 150 रुपये + टैक्स (गैर-एसी थिएटर) करने का आग्रह किया है।
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ओटीटी पर फिल्मों के प्रसारण से पहले 6-8 सप्ताह की रिलीज विंडो की मांग
इसके अलावा एक और महत्वपूर्ण सुझाव यह था कि पांच नियमित स्क्रीनिंग के अलावा सुबह के शो भी दिखाए जाएं। इसके साथ ही तमिल फिल्मों को तमिलनाडु से पहले दूसरे राज्यों में प्रीमियर होने से रोके जाने का भी आग्रह किया गया। ये उनके लिए एक गंभीर समस्या रही है, क्योंकि जब दूसरे राज्यों में सुबह के शो होते हैं, तो तमिलनाडु के थिएटरों से होने वाले कलेक्शन पर भी काफी असर पड़ता है। इसके अलावा ओटीटी पर फिल्मों के प्रसारण से पहले 6-8 सप्ताह की रिलीज विंडो के लिए भी अनुरोध किया गया है।
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घाटे से निपटने के लिए दिया सुझाव
एसोसिएशन द्वारा जारी एक बयान में कहा गया, “चूंकि थिएटर एमएसएमई नियमों के तहत संचालित होते हैं, इसलिए हम बिजली शुल्क के संबंध में एमएसएमई दिशानिर्देशों का पालन करने के लिए कहते हैं। यदि ये अनुरोध स्वीकार किए जाते हैं, तो थिएटर घाटे में चले बिना काम कर सकते हैं।" यह पहली बार नहीं है जब थियेटर मालिक संघ द्वारा ऐसी मांग की जा रही है। इसके साथ ही तमिल निर्माताओं के संगठन ने घोषणा की है कि अभिनेताओं, अभिनेत्रियों और तकनीशियनों के वेतन और अन्य खर्चों में वृद्धि के मुद्दों से निपटने के लिए 1 नवंबर से तमिल सिनेमा की शूटिंग से संबंधित सभी तरह के काम बंद कर दिए जाएंगे।
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