चार साल की उम्र में हो गया था संगीत से जुड़ाव
कीरावनी ने गोल्डन ग्लोब जीतकर इतिहास रच दिया। उनके नाटू नाटू गाने को बेस्ट ओरिजिनल सॉन्ग का पुरस्कार मिला है। उन्हें इसके लिए देश भर में शुभकामनाएं दी गईं। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें और आरआरआर की पूरी टीम को शुभकामनाएं दीं। बता दें कि कीरावनी ने महज चार साल की उम्र से संगीत से रिश्ता जोड़ लिया था। उस दौरान उन्होंने वायलिन सीखना शुरू किया था। उन्होंने संगीत के साथ अपनी पूरी दुनिया बना ली थी। एमएम कीरावनी और एमएम करीम एक ही व्यक्ति का नाम है। इस तरह से उनके नाम को लेकर अक्सर कंफ्यूजन रहता था।
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गुरु के कहने पर रहे घर से दूर
उनके इस नाम बदलने के पीछे एक कहानी है। एमएम कीरावनी की पत्नी एमएम श्रीवल्ली उस दौरान गर्भवती थी। तब उनके गुरु ने बताया था कि एमएम कीरावनी को अकाल मृत्यु का खतरा है और यह खतरा तभी टल सकता है, जब कीरावनी अपने परिवार से डेढ़ साल तक दूर संन्यासी की तरह जीवन बिताएं। इसके बाद कीरावनी ने अपने गुरु की कही हुई बात का पालन किया। गुरु के कहने पर उन्होंने नाम बदलकर काम शुरू किया। आपको बता दें कि कीरावनी ने तमिल फिल्मों में मराकादमनी के नाम से संगीत दिया था। इसके अलावा वह तेलुगू, बॉलीवुड और मलायालम फिल्मों में भी संगीत दे चुके हैं।
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कई फिल्मों के लिए दिए गाने
एमएम कीरावनी ने अपने करियर की शुरुआत असिस्टेंट म्यूजिक डायरेक्टर के तौर पर की थी। उन्होंने साल 1987 में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर तेलुगू फिल्म कलेक्टर गरी अभई से काम शुरू किया था। साल 1990 में निर्देशक एसएस राजामौली द्वारा तैयार फिल्म ‘मनसु ममता’ ने कीरावनी को पहचान दिलाई। उन्होंने बॉलीवुड की कई फिल्मों में म्यूजिक दिया है, जिसमें इस रात की सुबह नहीं, जख्म, साया, पहेली, जिस्म जैसी कई फिल्में शामिल हैं।