बॉलीवुड में ड्रीम गर्ल के नाम से मशहूर अभिनेत्री हेमा मालिनी हिंदी सिनेमा को बड़ी फिल्में दे चुकी हैं। 70 के दशक में हेमा मालिनी का नाम इंडस्ट्री की सबसे बड़ी अभिनेत्रियों में से एक था। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए हेमा ने कड़ी मेहनत की। मगर इतिहास के सुनहरे अक्षरों में अपना नाम दर्ज करवाने के लिए हेमा मालिनी को इंडस्ट्री में कुछ कठिन और निराशाजनक दौर से गुजरना पड़ा।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने से पहले हेमा मालिनी को उनके लुक्स के कारण रिजेक्शन का सामना करना पड़ा था। जानकारी के मुताबिक, साल 1963 में हेमा ने तमिल फिल्मों के लिए बैकग्राउंड डांसर के तौर पर काम किया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, वेनिरादाई नाम की एक तमिल फिल्म से निर्देशक सी.वी. श्रीधर ने उनके पतलेपन के कारण उन्हें बाहर कर दिया था। हेमा ने साल 1968 में महेश कौल निर्देशित अपनी पहली हिंदी फिल्म 'सपनों का सौदागर' में मुख्य भूमिका निभाई। इस फिल्म में हेमा मालिनी ने राज कपूर के साथ काम किया था।
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इस फिल्म के बाद अभिनेत्री ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और धीरे-धीरे अपने काम की वजह से उन्हें ड्रीम गर्ल का खिताब मिल गया। 1970 में आई फिल्म 'जॉनी मेरा नाम' से हेमा मालिनी को बॉलीवुड में पहचान मिली थी। विजय आनंद ने इस फिल्म का निर्देशन किया था। इसमें उन्होंने देव आनंद के साथ स्क्रीन साझा की थी। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर एक बड़ी हिट साबित हुई थी।
'जॉनी मेरा नाम' की सफलता के बाद हेमा ने हिंदी सिनेमा को कई हिट फिल्में दी, जिनमें 'सीता और गीता', 'अंदाज', 'सत्ते पे सत्ता', 'शोले' और 'लाल पत्थर' जैसी फिल्में शामिल थीं। साल 1977 में उन्होंने 'शोले' साइन की थी। ये फिल्म उनके करियर के सबसे बड़ी फिल्म बनकर उभरी। अभिनेत्री इसमें बसंती की भूमिका में नजर आई थीं। रमेश सिप्पी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में उनके साथ अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र दिखाई दिए थे।
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