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Samwad 2025: संवाद में अल्लाहबादिया मामले पर बोलीं 'बीसी आंटी'- बेतुकी बातें कहकर फेमस होने का चस्का गड़बड़

Fri, 18 Apr 2025 02:08 PM IST
ज्योति राघव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Amar Ujala Samwad 2025: अमर उजाला संवाद के दूसरे दिन इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में चर्चा जारी है। आज 18 अप्रैल को अभिनेत्री और लेखिका स्नेहिल दीक्षित मेहरा ने शिरकत की है। यहां उन्होंने कॉमेडी और सिनेमा पर दिलचस्प चर्चा की।
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स्नेहिल दीक्षित मेहरा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मनोरंजन जगत में अपनी कॉमेडी और क्रिएटिविटी के लिए मशहूर अभिनेत्री और कंटेंट क्रिएटर स्नेहिल दीक्षित मेहरा आज संवाद में शामिल हुईं। यहां उन्होंने रणवीर अल्लाहबादिया मामले पर भी बात की। स्नेहिल ने कहा कि  बेतुकी बातें कहकर लोकप्रिय होने का चस्का गड़बड़ है। बोलने की आजादी जरूरी है। लेकिन, क्या बोलना है यह जिम्मेदारी आपकी है। बता दें कि स्नेहिल अपने फैंस के बीच 'बीसी आंटी' (Bheri Cute Aunty) के नाम से मशहूर हैं। जानते हैं संवाद में उन्होंने और क्या कहा?

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संवाद के मंच पर पहुंचकर स्नेहिल ने दर्शकों से कहा, 'वैसे तो आप सब मुझे 'बीसी आंटी' के नाम से जानते हैं। जो नहीं जानते हैं उन्हें रिमाइंडर दे देती हूं, 'एजी, अमर उजाला संवाद कर रहा है'।
संवाद में स्नेहिल से पूछा गया, 'आप जर्नलिस्ट बनना चाहती थीं। अब आप राइटर हैं, क्रिएटिव डायरेक्टर हैं, एक्टर भी हैं और अब एक फिल्म भी लिख रही हैं। इतना सबकुछ कैसे शुरू हुआ?'
इस पर स्नेहिल ने कहा, 'अमूमन जैसा कि होता है जो आप बनना चाहते हैं, वैसा बन नहीं पाते। मैं पत्रकार बनना चाहती थी। लेकिन हमें भी घरवालों ने मना कर दिया और कहा कि प्रोफेशनल डिग्री लो। हमें भी इंजीनियर बना दिया गया। इंजीनियर बनने के बाद मैंने मुंबई जाकर बहुत कोशिश की कि किसी तरह जर्नलिस्ट बन सकूं। न्यूज से जुड़ जाऊं पर हो नहीं सका। ऐसे में यही सोचा कि फिल्म और टेलीविजन से जुड़ जाऊं। 

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स्नेहिल दीक्षित मेहरा - फोटो : अमर उजाला
18 साल टीवी और फिल्म इंडस्ट्री में किया काम
स्नेहिल ने आगे कहा, 'मैंने इंडस्ट्री में करीब 18 साल काम किया और मैंने बहुत बड़े-बड़े चैनल और शोज पर काम किया। खूब लिखा। टेलीविजन राइटिंग में मेरी बहुत अच्छी पकड़ बन गई थी। मुझे पता चला मैं बहुत अच्छी स्टोरीटेलर हूं। फिर भारत में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर शो आ रहे थे। एक सीरीज आई 'अपहरण', जिसकी वजह से मैं बीसी आंटी बनी। वहां मैं क्रिएटिव डायरेक्टर थी। वहां हमें एक कास्टिंग नहीं मिल रही थी जो एक लाइन बोल दे, 'एजी, गाली दे रहा है कोई'। उसके लिए मुझे चुना गया। वह मैंने बोली। मैंने उस मौके को हाथ से नहीं निकलने दिया। 'अपहरण' की वजह से कैमरे के सामने आई। ऊपर वाले की कृपा रही कि ऐसा हुआ। इंटरनेट की जनता ने नाम दिया 'बीसी आंटी'। यह श्रेय उन दर्शकों को जाता है, जिन्होंने सोशल मीडिया पर मुझे देखा और सराहा। और आज इतने बड़े मंच पर मैं यहां बैठी हूं'।

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स्नेहिल दीक्षित मेहरा - फोटो : अमर उजाला
स्नेहिल से पूछा गया कंटेंट क्रिएशन में क्या सीमा नहीं होनी चाहिए? पिछले दिनों रणवीर अल्लाहबादिया का मामला सभी ने देखा, आप क्या कहेंगी?
इस पर उन्होंने कहा, 'एक शब्द होता है इन्फ्लुएंसर। बतौर इन्फ्लुएंसर मेरे राजनीतिक विचार या किसी भी चीज पर विचार, किसी को भी प्रभावित कर सकते हैं। जैसे पत्रकारों को निष्पक्ष रहना होता है। उसी तरह इन्फ्लुएंसर को भी रहना होता है। मगर, सीमा कहां लांघ दी पता भी नहीं चलता। पैपराजी मुझे देखते हैं तो कहते हैं, 'एजी, गाली नहीं दी'। मैं हमेशा कहती हूं, 'कल दूंगी' और ऐसे कहकर टाल देती हूं, क्योंकि मैंने गाली फिल्म में एक किरदार निभाते हुए दी थी। मैं रियल लाइफ में ऐसा नहीं कर सकती। फिर, जहां माता-पिता को प्रभु तुल्य माना जाता है, वहां और जिम्मेदारी बढ़ जाती है। 

स्नेहिल दीक्षित मेहरा - फोटो : अमर उजाला
'संस्कार पकड़कर रहेंगे तो आसमान में उड़ सकेंगे'
रणवीर अल्लाहबादिया मामले पर बोलते हुए स्नेहिल ने आगे कहा, 'बोलने की आजादी जरूरी है। लेकिन, क्या बोलना है यह जिम्मेदारी आपकी है। वायरल होने का एक चस्का लग जाता है। लोग सोचते हैं कि ऐसा कुछ कह दें कि लोग कमेंट बॉक्स में आकर लड़ लें। लेकिन, कई बार एक कही गई बात दूर तलक जा सकती है। मेरा विचार थोड़ा सा रुढ़िवादी है। मेरी एक उम्र भी है। मैं इस प्लेटफॉर्म पर कहना चाहती हूं कि संस्कार पकड़कर रहेंगे, पैर जमीन पर होंगे तो ही आसमान में उड़ सकते हैं। बेतुकी बातें कहकर फेमस होने का चस्का गड़बड़ है'।

स्नेहिल दीक्षित मेहरा - फोटो : अमर उजाला
आप एक मां भी हैं। घर भी संभालना है और कंटेंट भी क्रिएट करना है। कैसे बैलेंस करती हैं?
स्नेहिल ने कहा, 'मैं टाइम मैनेजमेंट का बहुत ख्याल रखती हूं। पहले से एक कैलेंडर बनाकर रखती हूं। खुद को डेडलाइन देती हूं। आज मैं लखनऊ में हूं और आज मैं कोई दूसरा काम नहीं करने वाली हूं। यही मेरी गुरु मंत्र है कि जो काम कर रहे हैं, वही पूरा मन लगाकर करें। लोग पूछते हैं कि आप इतने सारे काम करती हैं, आपका स्पेशलाइजेशन क्या है? मैं यही कहती हूं कि मैं जिस पल जो कर रही हूं, उसी में स्पेशलाइज्ड हूं। कंटेंट क्रिएशन में मेरे लिए जो चीज काम करती है, वो ये है कि मैं कैमरा ऑन करने और ऑफ करने पर बस एक ही हूं। एक औरत जो अपने आपको आंटी कह रही है गर्व से, शायद वह लोगों को मुझमें बहुत अच्छा लगा'।

स्नेहिल दीक्षित मेहरा - फोटो : अमर उजाला
महिलाओं को लगता है कि आंटी शब्द उन्हें किसी ने गलत बोल दिया। आपका तो हैंडल ही इस नाम से है। आपने कैसे किया ऐसा?
स्नेहिल ने कहा, 'मैं उम्र के उसी पड़ाव पर हूं। मेरा टीनएज बेटा है। उसके दोस्त मुझे आंटी कहते हैं। कुछ वक्त बाद जब मेरे बाल पक जाएंगे तो शायद मेरा नाम बीसी अम्मा हो जाएगा।
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स्नेहिल दीक्षित मेहरा - फोटो : अमर उजाला
क्या चल रहा है आगे? क्या नया ला रही हैं?
स्नेहिल ने बताया, 'बीसी आंटी तो चल ही रहा है। मैं उसे लेकर बहुत लालची औरत हूं। वीडियो आते रहेंगे, ऐसे ही प्यार देते रहिए। अब मैं एक फिल्म लिख रही हूं। मैं महिला सशक्तीकरण के बारे में बहुत सोचती हूं। मेरी कोशिश है कि ऐसी एक कहानी दर्शकों के पास लेकर आऊं'। आखिर में उन्होंने अपने अंदाज में एक संवाद बोला- 'बहुत मजा आ गया आपसे बात करके एकदम दिल ही खुश कर दिया'।

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