सीन मिलते ही शुरू कर दी भाषणबाजी
अमित सियाल से जब पूछा गया कि 'महारानी' सीरीज आप कर रहे थे तो आपके किरदार में एक किरदार दिखाई दे रहा था। क्या आपको ऐसा लगा कि आपका किरदार किसी से रिलेट हो रहा है? इस पर अमित सियाल ने कहा, 'मैं उन दिनों बहुत काम कर रहा था। मैंने 'महारानी' के किरदार को थोड़ा कम सीरियस लिया। पहले दिन मैं पहुंचा तो उन्होंने बहुत मुश्किल सीन दिया। मेरी आदत है कि लाइनों को अपनी तरफ से बनाकर बोलता हूं। मुझे सीन दिए गए तो मैंने कुछ भाषणबाजी चालू करी। लेकिन सुभाष भाई (लेखक सुभाष कपूर) बोले कि लाइनें क्यों बदल रहा है तू। फिर से सीन कर'।
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'कभी-कभी दूसरों की बात सही निकलती है'
इसके अलावा अमित सियाल से पूछा गया कि कई बार साथ के लोग कुछ सुझाव देते हैं। आपको कभी ऐसा लगा शूट पर कि ये क्या बता रहा है मुझे? इस पर उन्होंने कहा, 'यह रोज होता है। यह किसी भी काम में होगा। हमारे भी काम में होता है। बहुत बार होता है। कभी-कभी दूसरे की बात सही निकलती है। कभी-कभी हमारी बात सही निकलती है। अपना जो काम है, उसमें बहुत सारे डिपार्टमेंट हैं। सारे लोग बहुत महत्वपूर्ण है। अगर सब साथ में मिलकर एक बुत नहीं खड़ा करेंगे तो काम कैसे होगा'?
जब काम नहीं होता था तो ऑडिशन देने में होती थी कोफ्त
अमित सियाल ने आगे कहा, 'मगर, एक मजेदार किस्सा है कि जब काम नहीं होता था तो मुझे ऑडिशन देने में बड़ी कोफ्त होती थी। मैं एक दिन गया ऑडिशन देने तो एक-दो लाइनें बोलीं। फिर मैंने कहा कि एक और ऑडिशन देना चाहता हूं। उन्होंने कहा कि अब क्या कर लोगे तुम? मैंने कहा कि कुछ और बेहतर कर सकता हूं। मुझे लगा कि ये लोग जो ऑडिशन लेने आए हैं, वो अपना समय काटने आए हैं। आठ घंटे पूरे करने आए हैं। ऐसी बहुत चीजें हुईं। और जब जवानी ज्यादा थी तो बहुत लड़ाई-झगड़े भी हो जाते थे। बहुत गुस्सा आ जाती थी। अब तरस आने लगा है। अब सोचता हूं कि साउंड, कैमरा एक्शन के बाद तो मुझे ही काम करना है। बताने दो अभी कोई कितना बता रहा है'।