सूरज का सातवां घोड़ा, मम्मो, गुलाम, रोक सको तो रोक लो, वेलकम टू सज्जनपुर, गुजारिश, शैतान और राजी समेत कई फिल्मों में अभिनय करने वाले दिग्गज अभिनेता रजित कपूर ने कलाकारों को मिलने वाली फीस को लेकर खुलकर बात की है। उन्होंने फिल्मी कलाकारों की दुर्दशा को समझाते हुए बताया कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है।
कुछ अभिनेता तो बिना पैसे के ही काम कर रहे
इंडस्ट्री में कुछ अभिनेता तो ऐसे भी हैं, जो मौके मिलने की वजह से ही मुफ्त में काम कर रहे हैं। उन्हें कोई पैसा नहीं दिया जा रहा है। आज भी कलाकारों का शोषण जारी है। कोई कलाकार 20 हजार रुपये का हकदार है तो उसे कह दिया जाएगा कि काम करना है तो 10 हजार में करिए। नहीं तो इस मौके की राह कई लोग देख रहे हैं। ये तमाम बातें रजित कपूर ने समदिश भाटिया को दिए एक साक्षात्कार में बताई, जो वाकई में हैरान कर देने वाली है।
निर्माता के खिलाफ आवाज उठाई तो काम मिलना मुश्किल
रजित कपूर ने और भी चिंताजनक बात बताते हुए कहा कि अगर किसी निर्माता के खिलाफ आवाज उठाई जाए तो इस बात की संभावना है कि आगे कोई काम ही ना मिले। उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि वो खुद इस बात को सुन चुके हैं कि मुख्य कलाकारों को फिल्म के बजट का 50% दिया जा रहा है और सहायक कलाकारों के लिए जवाब आता है कि सर, हमारे पास पैसे नहीं हैं।
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कलाकारों को 90 दिन तक भी काम का पैसा नहीं मिलता
रजित ने कहा कि कलाकारों को कम पैसे मिलने की एक वजह यह भी है कि इंडस्ट्री में इसके लिए कोई व्यवस्था या प्रणाली नहीं है। कलाकारों की फीस को लेकर लड़ने के लिए कोई आदमी तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि लोगों को 90 दिनों तक भी उनके काम का पैसा नहीं मिलता है। रजित ने ओटीटी पर बात करते हुए कहा कि बेशक इसके आने से काम के मौकों में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन इसका ये मतलब कतई नहीं है कि शोषण नहीं हो रहा है।
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