फिल्म 'प्रेम नगर' की रिलीज को आज 50 साल पूरे हो गए हैं। इस फिल्म में राजेश खन्ना और हेमा मालिनी मुख्य भूमिका में नजर आए। इस फिल्म में काका करण सिंह की भूमिका में दिखे। रईस परिवार का करण, लता (हेमा मालिनी) को उसके बॉस से बचाता है और अपनी सेक्रेटरी के रूप में नौकरी पर रखता है। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ती हैं। फिल्म 'प्रेम नगर' वर्ष 1971 में आई डी रामानायडू द्वारा निर्देशति इसी नाम की तेलुगु फिल्म की हिंदी रीमेक थी। राजेश खन्ना का फिल्मों में संवाद बोलने का अलग अंदाज था। उनके डायलॉग आज भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय हैं। 'प्रेम नगर' की 50वीं सालगिरह पर जानते हैं राजेश खन्ना की चर्चित फिल्मों के चर्चित डायलॉग...
'आराधना'
राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर अभिनीत फिल्म 'आराधना' के डायलॉग खूब हिट हुए। वर्ष 1969 में आई इस फिल्म ने काका के करियर को नया मुकाम दिया था। इसका एक डायलॉग काफी हिट है, 'एक छोटा सा जख्म बहुत गहरा दाग बन सकता है और एक छोटी सी मुलाकात जीवन भर का साथ बन सकती है'।
'अवतार'
राजेश खन्ना की यह एक पारिवारिक फिल्म है। इस फिल्म में एक बूढ़े माता-पिता के अमीरी से गरीबी तक के सफर को दिखाया गया है। फिल्म में एक डायलॉग है, 'सेठ जिसे तुम खरीदने चले हो उसके चेहरे पर लिखा है नॉट फॉर सेल'। यह खूब लोकप्रिय हुआ।
'बावर्ची'
ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म 'बावर्ची' (1972) में राजेश खन्ना एक बावर्ची के किरदार में नजर आए। अपने विनम्र स्वभाव से वे पूरे परिवार के न सिर्फ चहेते बन जाते हैं, बल्कि उस परिवार में एकता का पाठ भी पढ़ा देते हैं। फिल्म का ये डॉयलॉग काफी हिट रहा, 'जिसमे इंसान की भलाई हो, वो काम बुरा नहीं होता'।
'अमर प्रेम'
वर्ष 1972 में आई इस फिल्म में राजेश खन्ना की जोड़ी फिर शर्मिला टैगोर के साथ जमी। फिल्म का डायलॉग इतना हिट हुआ कि बच्चे-बच्चे की जुबान पर रहता है। वह डायलॉग है, 'पुष्पा मुझसे यह आंसू नहीं देखे जाते, आई हेट टीयर्स'।
'सफर'
असित सेन के डायरेक्टर में बनी फिल्म 'सफर' में राजेश खन्ना एक गंभीर बीमारी से जूझ रहे होते हैं। फिल्म में उनका डायलॉग है-'मैं मरने से पहले मरना नहीं चाहता'। यह काफी हिट रहा।
'रोटी'
1974 में राजेश कुमार और मुमताज की फिल्म आई थी। इसमें दिखाया गया कि गरीबों को एक रोटी के लिए किस कदर जद्दोजेहद करनी पड़ती है। एक भूखा पेट कैसे गरीब आदमी को कमजोर बना देता है। फिल्म का ये डायलॉग लोगों के दिलों में बस गया- 'इंसान को दिल दे, दिमाग दे, जिस्म दे कमबख्त ये पेट न दे'।
'आनंद'
राजेश खन्ना की इस फिल्म के डायलॉग भला कोई कैसे भूल सकता है! जिस जिंदादिली से उन्होंने अपना किरदार अदा किया, वैसे ही उनके डायलॉग रहे। कई जगह भावुक करने वाले डायलॉग रहे। इस फिल्म के फेमस डायलॉग गुलजार ने लिखे हैं और इसके लिए उन्हें बेस्ट डायलॉग का फिल्मफेयर अवार्ड भी मिला था। फिल्म का यह डायलॉग खूब हिट है, 'अरे ओ बाबू मोशाय, हम तो रंगमंच की कठपुतलियां हैं जिनकी डोर ऊपर वाले के हाथ में हैं, कब कौन कहां उठेगा यह कोई नहीं जानता। बाबू मोशाय जिंदगी बड़ी होनी चाहिए, लंबी नहीं'।
'नमक हराम'
इस फिल्म का हिट डायलॉग है- 'मैंने तेरा नमक खाया है, इसलिए तेरी नजरों में नमक हराम जरूर हूं, लेकिन जिसने ये नमक बनाया है, उसकी नजरों में नमक हराम नहीं हूं।'
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'आराधना'
'एक छोटा सा जख्म बहुत गहरा दाग बन सकता है। और एक छोटी सी मुलाकात जीवन भर साथ बन सकती है'। यह डायलॉग भी काका की फिल्म 'आराधना' का है।
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'स्वर्ग'
'इन्हें माफ न करने के बदले में अगर भगवान मुझे नरक में भी जगह दे दे तो मुझे इस बात का अफसोस नहीं होगा। मगर मैं इन्हें दोबारा स्वर्ग में जगह नहीं दूंगा'। यह डायलॉग फिल्म 'स्वर्ग' का है।
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