इसी बीच पार्थवी के पिता चुनाव जीत जाते हैं और पुलिस मधु और उसके दोनों दोस्तों को उठाकर थाने में ले आती है। उन लोगों को बहुत मारा पीटा जाता है और पार्थवी के पिता के कहने पर उन्हें लोगों से छिपाकर मारने का ऑर्डर मिलता है। दरअसल, पुलिस भी इन सब में मिली होती है और दो प्यार करने वालों की दुश्मन बनी बैठी रहती है। पार्थवी अपने प्यार को पिता के हाथ से बचाना चाहती है। उसकी मां उसका साथ देती है और उसे कमरे से निकालकर मधु तक पहुंचा देती है। बस फिर क्या था आज के मॉर्डन जमाने में लड़कियां किसी से कम नहीं। उन्हें अपने प्यार को हर दुश्मन से बचाना आता है। पुलिस वाले की बंदुक निकालकर पार्थवी उसे अपनी कनपटी पर लगाती है और खुद को गोली मार देने का डर दिखाते हुए अपने प्यार मधु और उसके दो दोस्तों को वहां से भगा ले जाती है। मधु और पार्थवी प्यार के दुश्मनों से भागते-भागते एक अंजान शहर कोलकाता जा पहुंचते हैं जहां उन्हें कुछ ऐसे लोग मिलते हैं जो अपनों की तरह उनकी मदद करते हैं।