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सिंह साहब द ग्रेटः गांधी, पटेल और भगत सिंह का कॉकटेल

Fri, 22 Nov 2013 04:42 PM IST
अमर उजाला मुंबई/रवि बुले
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थोड़ा गांधी भी है, थोड़ा पटेल भी है... तो थोड़ा भगत सिंह भी है।चिर-परिचित ढाई किलो के हाथ वाले ऐक्शन के साथ थोड़ा रोमांटिक और थोड़ा कॉमिक। यह सिंह साब हैं। सनी देओल का नया अवतार। निर्देशक अनिल शर्मा और सनी की जोड़ी एक बार फिर पुराना जादू पैदा करती है। तमाम मसालेदार तड़कों के बावजूद कुछ बातें बड़ी ईमानदारी से करती है। रक्त-रंजित बदले की नहीं, भ्रष्ट सिस्टम में बदलाव की बात करती है।
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फिल्म की कहानी परंपरागत रास्तों पर बढ़ती है, जिसमें हीरो ईमानदार है और बेईमान-ताकतवर राजनीतिक व्यवस्था का शिकार होता है। कलेक्टर करनजीत तलवार (सनी) को अपनी ईमानदारी की कीमत चुकानी पड़ती है और रिश्वत के झूठे इल्जाम में जेल जाना पड़ता है। उनका परिवार टूट जाता है। यह सब होता है भ्रष्ट भूदेव सिंह (प्रकाश राज) के कारण। लेकिन हीरो लौटता है।

जब गांधी की तरह बात नहीं बनती, जब पटेल की तरह पूरी तरह सुनी नहीं जाती... तो वह भगत सिंह बनता है। सनी देओल का पुराना अंदाज और संवाद दर्शकों को उद्वेलित करते हैं... बलि शेर की नहीं, बकरे की दी जाती है! हालांकि यहां सौ फीसदी ऐक्शन हीरो की तरह सामने नहीं आते। वह सिंह साब के नाम से सोशल वर्कर के रूप में उभरते हैं और भ्रष्ट भूदेव की अक्ल रास्ते पर लाते हैं।
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फिल्म का परिदृश्य उत्तर भारतीय है। सनी देसी हीरो की तरह नजर आते हैं, जो हमारे पास का ही है। उनके एक्शन सुपरहीरो की तरह नहीं, बल्कि बॉलीवुड हीरो की तरह हैं। अनिल शर्मा ने भ्रष्टाचार के खिलाफ इस लड़ाई को आम आदमी के नजरिये से बनाया है। सनी इस लड़ाई में मसीहा की तरह उभरते हैं। फिल्म पूरी तरह से उनकी है। लेकिन प्रकाश राज ने भी बेहतरीन काम किया है और दर्शक के दिल पर अपनी छाप छोड़ते हैं। ‘सिंघम’ के बाद संभवतः यह उनकी सबसे अच्छी खलनायकी है।

उर्वशी रौतेला की शुरुआत अच्छी है। सनी के अपोजिट वह जमी हैं। लेकिन बॉलीवुड में पैर जमाने के लिए उन्हें कुछ और मेहनत करनी होगी। अपने लिए ऐसे रोल तलाशने होंगे, जिनमें उन्हें पर्दे पर ज्यादा से ज्यादा जगह मिले। अमृता राव कुछ दृश्यों में प्रभावित करती हैं।

अनिल शर्मा का निर्देशन कसा हुआ है। वे एक पारंपरिक कहानी को रोचक अंदाज में कह जाते हैं। वे अपनी अन्य फिल्मों की तरह यहां भी नैतिक और पारिवारिक मूल्यों को बरकरार रखते हैं। हालांकि उनकी फिल्म में समीर का लिखा ‘पलंग तोड़ पान’ जैसा गाना चौंकाता है। सनी और अनिल शर्मा की जोड़ी को चाहने वाले दर्शक इस फिल्म को किसी हाल में छोड़ना नहीं चाहेंगे।
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