-निर्माताः भूषण कुमार, अरुणा भाटिया, निखिल आडवाणी
-निर्देशकः राजा कृष्ण मेनन
-सितारेः अक्षय कुमार, निमरत कौर, फरयान वजीर, इनामुल हक, पूरब कोहली, कुमुद मिश्रा
रेटिंग **1/2
अगस्त 1990 में इराक हमले के बाद कुवैत में एक लाख 70 हजार भारतीय जब फंस गए तो क्या हुआ? भारत सरकार ने इन्हें युद्धग्रस्त क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकाला और यह एक विश्व रिकॉर्ड है। कभी ऐसा नहीं हुआ कि किसी देश ने अपने इतने नागरिकों की जान बचाई। सिनेमा दस्तावेजों को कहानी में बदलता है। एयरलिफ्ट भी यही करती है।
इंसान किस्म-किस्म के होते हैं। कुछ मुश्किल देखते ही यहां-वहां मुंह छुपाने लगते हैं और कुछ के भीतर छुपी ताकत उभर आती है। एयरलिफ्ट में खुद को कुवैती मान चुके भारतीय मूल के उद्योगपति रंजीत काटियार (अक्षय कुमार) दूसरे किस्म के इंसान हैं।
कभी व्यक्ति को एक मिनट में उसकी औकात दिखा देने वाला रंजीत कठिन समय में नए किरदार के रूप में सामने आता है। वह स्वार्थी होकर पत्नी-बच्ची को लेकर निकल जाने के बजाय लाखों लोगों की जान बचाने का फैसला करता है। दो घंटे से अधिक की फिल्म का यही प्लॉट है। इससे अधिक कुछ नहीं है।
एयरलिफ्ट का कथानक बड़ा है लेकिन...
एयरलिफ्ट में दृश्यों की एक श्रृंखला है जो रिफ्यूजी बन चुके हिंदुस्तानियों की तस्वीरों को एक धागे में पिरोती है। इसी के बीच रंजीत बगदाद के भारतीय दूतावास और दिल्ली में विदेश मंत्रालय से मदद पाने की कोशिश करता नजर आता है।
यहां आप देखते हैं कि सरकारी तंत्र कैसे काम करता है। मंत्री लेकर संत्री तक अपने में मस्त हैं। मगर इन्हीं में कुछ अधिकारी ऐसे भी हैं जिनके दिल में परदेस में बसे अपनों के लिए दर्द है। अतः एक बड़ा मिशन कुछ थोड़े से लोगों की वजह से कामयाब होता है।
एयरलिफ्ट का कथानक बड़ा है लेकिन इसे रोचक और जरूरी तनाव बनाए रखने वाले छोटे प्लाट नहीं हैं। रंजीत और उसके परिवार के अतिरिक्त दो-तीन किरदार और उभर कर आते हैं। बाकी यहां सिर्फ भीड़ है, जिसके हिस्से कोई काम नहीं है। इराकी सेना के कुवैत पर हमले, सैनिकों द्वारा लूट-पाट के दृश्य यहां है।
इराकी जनरल के रूप में इनामुलहक के सीन संजीदा माहौल को हल्का बनाने का प्रयास करते हैं परंतु प्रभाव नहीं छोड़ते। फिल्म उन दर्शकों को पसंद आएगी जो सिनेमा में कुछ नया खोजना चाहते हैं।
फिल्म में अभिनय, निर्देशन, संदेश कैसा है? अक्षय कैसे लग रहे हैं
अक्षय कुमार हर नई फिल्म में पहले से बेहतर नजर आते हैं। निमरत कौर के साथ उनकी जोड़ी अच्छी लगी है। निमरत प्रभावित करती हैं। निर्देशक की फिल्म पर पकड़ है। सिनेमाई मनोरंजन की उम्मीद करने वाले दर्शक निराश होंगे।
कहानी में एयरलिफ्ट नाममात्र को है। ऐसे में फिल्म का शीर्षक सवालों के घेरे में आ जाता है। फिल्म का निर्णायक संदेश यही है कि देश ने आपके लिए क्या किया यह मत देखिए, सोचिए कि आपने देश के लिए क्या किया!