फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

समलैंगिकता को नए अंदाज में परोसती है 'क्रेजी कुक्कड़ फैमिली'

Fri, 16 Jan 2015 03:49 PM IST
रवि बुले/ अमर उजाला, मुंबई ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन
जाना था जापान पहुंच गए चीन। निर्देशक रितेश मेनन की पहली फिल्म 'क्रेजी कुक्कड़ फैमिली' कुछ ऐसा ही एहसास देती है। आप कॉमेडी देख कर क्रेजी होने जाएंगे और पता चलेगा कि निराश होकर लौटे हैं। आश्चर्य की बात है कि जो प्रकाश झा अपनी फिल्मों में यथार्थ के लिए प्रतिबद्ध दिखते हैं उनके बैनर में अन्य निर्देशक बे-सिर-पैर की तुकों को बैठाने का संघर्ष कर रहा है।
विज्ञापन


एक ऐसे परिवार की कहानी यहां है, जिसका मुखिया मरने को टिका है और उसके बच्चों की नजर 172 साल पुराने विशाल घर और जमीन पर लगी है। लेकिन यह मोटा खाका है।

फिल्म आपसी पारिवारिक जद्दोजहद की उतनी नहीं है, जितनी परिवार के बाहर इन लोगों के दंदफंद की। असल में जटिल रिश्तों की कहानी अपने लेखन में कड़ी मेहनत की मांग करती है। जब आधे निर्देशक, आधे ऐक्टर मिल कर कहानी लिखेंगे तो ऐसा ही ‘कुक्कड़’ बनेगा!

लेखन पूर्णकालिक-गंभीर काम है, यह किसी भी फिल्म की नींव है। यह बात फिल्म इंडस्ट्री के लोग प्रोफेशनल और कारपोरेट होने जैसे तमाम दावों के बावजूद नहीं समझ सके हैं।
विज्ञापन


निर्देशक के पास कहानी का ठोस आधार न होने के कारण उसे फिल्म में अजीबोगरीब किस्सों के टुकड़े जोड़ने पड़े। मूल कथा में पैबंद अलग दिखते हैं। जैसे नायिका के पति का क्रॉसड्रेसर होना। बेचारा पत्नी से कुछ कह नहीं पाता और अकेले में उसके कपड़े पहन कर आईने के सामने खड़ा हो अपने गाल पर तमाचे मारता रहता है।

चार भाई-बहनों में से एक जब न्यूजीलैंड से आता है तो कुछ ड्रामे के बाद राज खुलता है कि वह समलैंगिक है और परदेस में एक लड़के को ‘पति’ बना चुका है। जहां परिवार इकट्ठा हुआ है वहां पुलिस के तीन आदमी छुप कर निगरानी कर रहे हैं क्योंकि उन्हें पता है कि यहां वह नेतानुमा डॉन आएगा, जिसने पचास करोड़ रुपया इन भाई-बहनों में से एक को उधार दे रखा है!

इस नेतानुमा डॉन के और भी काले धंधे हैं। कहानी टुकड़ों में बंटी है और भाई-बहन के बीच संपत्ति के बंटवारे को लेकर कोई क्रेजी बात सामने नहीं आती। 105 मिनट बेकार चले जाना अखरता है।

ऐक्टर के रूप में स्वानंद किरकिरे और शिल्पा शुक्ला निराश करते हैं। मोरक्को मूल की मॉडल नोरा फतेही न केवल खूबसूरत लगी हैं, बल्कि उनका अभिनय अलग नजर आता है।

यहां गीत-संगीत में सुनने जैसा कुछ नहीं है। सेक्सी वाला पकोड़ा... गाने जैसा कुछ हैरान करता है कि पागलपन की कोई हद नहीं होती। निर्देशक के रूप में रितेश इतना जरूर साबित करते हैं कि उन्हें एक और मौका मिलना चाहिए।
विज्ञापन

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें