कलाकार: पलोमी घोष, समीरा आनंद, पलाश कांबले, मिखाइल गांधी, आर्यांश मालवीय, पूरब कोहली, समीर कोचर और कंवलजीत सिंह।
लेखक-निर्देशक: सुजॉय घोष
ओटीटी: नेटफ्लिक्स
एक वेब सीरीज की सबसे बड़ी कामयाबी ये है कि ये दर्शक को इसके एक सीजन के सारे एपीसोड्स एक बार में देखने (बिंज वाचिंग) के लिए मजबूर कर दे। कहानी का एपीसोड वार विभाजन ऐसा हो कि एक के खत्म होते ही दूसरे को तुरंत देखने की ललक दर्शक के मन में जागे। सुजॉय घोष की नई पेशकश वेब सीरीज टाइपराइटर पहले के चार एपीसोड्स तक आपको इसी तरह बांधे रखती है। पांचवां और पहले सीजन का आखिरी एपीसोड जरूर थोड़ा बेहतर तरीके से अंत तक पहुंच सकता था, लेकिन फिर भी यह अगले सीजन के लिए उत्सुकता छोड़ जाता है।
कहानी, बदला औऱ तीन जैसी फिल्में बना चुके सुजॉय घोष बचपन से एनिड ब्लायटन के फैन रहे हैं। सोने से पहले हॉरर सीरीज देखने का चस्का भी उन्हें रहा है। नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज टाइपराइटर में उन्हें अपना बचपन फिर से जीने का मौका मिला है। अपनी सारी फंतासियों को वह ले आए हैं गोवा की एक सुनसान जगह में बनी हवेली बारडेज विला में। विला का अपना एक डरावना अतीत है। लेकिन, जब अपना बचपन इसी हवेली में गुजार चुकी जेनी अपने पति और दो बच्चों के साथ यहां वापस लौटती है तो उसे कुछ याद नहीं होता।
जेनी अपने अतीत की बातें खोजने निकलती है और जो भी उससे मिलता है, उनके साथ हादसे होने शुरू हो जाते हैं। स्कूल के बच्चों का घोस्ट क्लब जेनी के बाबा की लिखी घोस्ट ऑफ सुल्तानपुर का फैन है। वह किताब की हर बात पर आंख मूंद कर यकीन करते हैं और कहानी ट्विस्ट तब लेती है जब क्लब की लीडर समीरा को जेनी का दूसरा रूप दिखाई देता है।
अपनी सेटिंग, लाइटिंग, कैमरा और पटकथा की मजबूती के चलते टाइपराइटर के पांचों एपीसोड बिंज वाचिंग के लिए मजबूर करते हैं। सुजॉय घोष की ये हॉरर सीरीज हिंदी के वेब कंटेंट में नई पहल है। पलोमी घोष ने एक तरह से पूरी सीरीज का भार अपने कंधों पर रखा है। उनके भाव कहानी की जरूरत के हिसाब से बहुत खूबसूरती से बदलते हैं। खूबसूरत भी कुछ दृश्यों में कमाल की लगी हैं। सीरीज के बड़े कलाकारों ने भले प्रभावशाली अभिनय न किया हो लेकिन बच्चे इस सीरीज की जान हैं, खासतौर से समीरा आनंद और मिखाइल गांधी। आने वाले वीकएंड पर बिंज वाच के लिए ये बिल्कुल सही सीरीज है।