अतंर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाया मलयालम सिनेमा
शाजी एन करुण को कुछ दिन पहले ही एक समारोह में मलयालम सिनेमा में उनके आजीवन योगदान के लिए जे सी डैनियल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। यह राज्य सरकार द्वारा दिया जाने वाला सर्वोच्च फिल्म सम्मान है। शाजी उन कुछ फिल्म निर्माताओं में से थे, जिन्होंने तमाम चुनौतियों और बाधाओं को तोड़ते हुए मलयालम सिनेमा की विरासत को अंतर्राष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाया।
70 अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित हुई डेब्यू फिल्म
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, इंडस्ट्री के सूत्रों के अनुसार निर्माता शाजी एन करुण ने तिरुवनंतपुरम में अंतिम सांस ली। शाजी की पहली फिल्म 'पिरवी' (1988) को लगभग 70 अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोहों में प्रदर्शित किया गया, जबकि उनकी दूसरी फिल्म 'स्वाहम' (1994) को कान फिल्म समारोह में पाल्मे डी'ओर के लिए नामांकित किया गया। उनकी 'वानप्रस्थम' (1999) भी कान में प्रदर्शित की गई।
केरल राज्य चलचित्र अकादमी के प्रमुख अध्यक्ष थे
करुण की फिल्मों ने सात राष्ट्रीय पुरस्कार और इतने ही केरल राज्य पुरस्कार जीते हैं। उनकी 'कुट्टी स्रांक' को 2010 में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। पद्मश्री और फ्रांसीसी सम्मान 'ऑर्डर ऑफ आर्ट्स एंड लेटर्स' जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित करुण केरल राज्य चलचित्र अकादमी के प्रमुख अध्यक्ष थे। उन्होंने केरल राज्य फिल्म विकास निगम (केएसएफडीसी) के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया।