भारतीय डीओपी संतोष सिवन को इस वर्ष कान फिल्म फेस्टिवल में पियरे एंजनीक्स एक्सेललेंस पुरस्कार मिला है। फिल्म इंडस्ट्री के कई दिग्गजों ने उन्हें इसके लिए बधाई दी है. पेशेवर सिनेमा लेंस निर्माता एंजनीक्स द्वारा यह पुरस्कार एक उभरती प्रतिभा को दी जाती है।
अमेरिकन सोसाइटी ऑफ सिनेमैटोग्राफर्स के पहले भारतीय सदस्य
सिवन ने 55 फीचर फिल्मों की शूटिंग की है, जिनमें मणिरत्नम की 'रोजा' 'थालापति' 'दिल' से और 'इरुवर' शामिल है। इसके अलावा उन्होंने 'वानराप्रस्थम' शाजी एन. करुण के लिए, 'मिनाक्षी' एम.एफ. हुसैन के लिए, 'ब्राइड एंड प्रेजुडिस' गुरिंदर चड्ढा के लिए शूट की है, जिन्हें कान के लिए चयनित किया गया है। इसके साथ ही उन्होंने 50 से अधिक डॉक्यूमेंट्रीज की भी शूटिंग की है और 17 फीचर फिल्मों का निर्देशन किया है। इनमें सनडांस चयन 'द टेररिस्ट' और वेनिस तथा टोरंटो चयन 'अशोका' भी शामिल हैं, जो शाहरुख खान द्वारा निर्मित और अभिनीत है। सिवन अमेरिकन सोसाइटी ऑफ सिनेमैटोग्राफर्स के पहले भारतीय सदस्य भी हैं।
पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले एशियाई
सिवान यह पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले एशियाई हैं। इससे पहले एग्नेस गोडार्ड, ब्रूनो डेलबोनेल, एडवर्ड लैचमैन, क्रिस्टोफर डॉयल, पीटर सुचित्ज़की, रोजर डीकिन्स, विल्मोस ज़्सिगमंड, डेरियस खोंडजी और फिलिप रूसेलॉट को यह सम्मान मिला है। इस दौरान सिवन ने बताया कि उन्होंने साल 1998 में आई आमिर खान की फिल्म 'राख' में एंजिनीक्स लेंस का इस्तेमाल किया था। इसके बाद उन्होंने कुछ और लेंस भी खरीदे थे। सिवन ने बताया कि यह पुरस्कार उनके लिए काफी मायने रखता है। इससे पहले यह पुरस्कार जिगमंड और डीकिन्स को मिला था, जिनका वह काफी सम्मान करते हैं। इस दौरान उन्होंने केरल की संस्कृति को ट्रिब्यूट दिया। उनका केरल से गहरा नाता है और यही से उनकी यात्रा शुरु भी हुई थी। इस दौरान मीडिया से बात करते हुए सिवन ने कहा,'यह पुरस्कार इस बात का सबूत है कि आप चाहे जिस भी भाषा को समझते हों, लेकिन कैमरे के जरिए बोली गई भाषा सब को समझ आती है और पूरी दुनिया में सब के लिए दिलचस्प होती है'।
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याद आता है सेल्युलाइड का दौर
सिवन को सेल्युलाइड वाला दौर काफी याद आता है। उन्होंने 'उरुमी' के वक्त डिजिटल में होते बदलावों को देखा था। इस फिल्म का निर्देशन भी उन्होंने ही किया था। इसे टेप पर फिल्माया गया था। पूर्ण रूप से डिजिटल पर शूट हुई उनकी पहली फिल्म 'थुप्पक्की' थी। इसमें तामिल सुपरस्टार विजय मुख्य भूमिका में नजर आए थे। डिजिटल को लेकर उन्होंने बताया कि आप हमेशा मॉनिटर देखते रह सकते हैं, जिससे काफी फायदा होता है।
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नए लोगों को दी सलाह
इस लाइन में आने वाले नए लोगों को सलाह देते हुए सिवन ने कहा,'आपको चीजों को समझते रहना चाहिए और सबसे महत्वपूर्ण बात आपको प्रयोग करते रहना चाहिए। आपको सेफ खेलने या दूसरों की नकल करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। आप वही करें, जो स्वाभाविक रूप से आपको आती हो। हमेशा चौकन्ना रहिए और प्रयोग करते रहिए'।
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शाहरुख प्यार से सैंटा बुलाते हैं
यह पुरस्कार मिलने के बाद सिवन को लगातार बधाईयां मिल रही हैं। शाहरुख खान इन्हें प्यार से सैंटा कहते है,जो इंडस्ट्री में सिवन के दोस्त जैसे हैं। उन्होंने कहा,'उसने मुझे सिखाया है कि जीनियस चीजें सोची नहीं जा सकती, इन्हें महसूस किया जाता है। हमारा विश्वास बॉक्स ऑफिस सफलता से कहीं ऊपर होना चाहिए। सबसे अहम उन्होंने हमे सिखाया कि फिल्म बनाने में सबसे ज्यादा आनंद तब है, जब आप आने वाली सभी बाधाओं को पार करते जाएं। डीओपी के रूप में सैंटा का काम बेहद अनोखा और ओरिजिनल है, क्योंकि यह उनके अनुभवों और भारतीय संस्कृति में बसा है। यह काफी रहस्मयी और स्वागतयोग्य है। सैंटा सेट पर काफी ऊर्जावान रहते हैं। यह पुरस्कार जीत कर हमें और भारत को गौरवान्वित करने के लिए आपका धन्यवाद'।
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आमिर और मणिरत्नम ने भी की तारीफ
आमिर ने भी सिवान की तारीफ करते हुए करते हुए सेट पर उनके तेज गति से काम करने और घुलमिल जाने की अदा की तारीफ की है। उन्होंने कहा,'फिल्म को लेकर उनकी समझ महज एक डीओपी की तरह नहीं है। वह फिल्म को अन्य निर्माताओं की दृष्टि से देखते हैं'।मणिरत्नम ने कहा,'उनके साथ कोई ऐसे हालात नहीं, जिसे प्रकाश में लाना मुश्किल हो। वह जहां से आते हैं, उन्होंने अपने आसपास की सभी चीजों को अंदर बसा लिया है। वह प्रकृति का बहुत अच्छे से उपयोग करते हैं। वह प्रकाश की सभी उपलब्ध साधनों का बखूबी इस्तेमाल करते हैं'।
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उनका हर एक फ्रेम पेंटिग होता है- विद्या बालन
'उरुमी' अभिनेत्री विद्या बालन ने कहा,'एक ऐसी चीज थी जिसकी मुझे कोई चिंता नही थी। मैं कैसी लग रही हूं, ये मुझे बिल्कुल भी सोचने की जरुरत नहीं पड़ती थी। उनका हर एक फ्रेम एक पेंटिग के जैसा होता है। यह एक कविता है'। वहीं, फिल्म निर्माता-निर्देशक करण जौहर ने कहा,' वह एक प्राकृतिक शक्ति हैं। मुझे अभी भी याद है उन्होंने मेरे बतौर निर्देशक डेब्यू फिल्म 'कुछ कुछ होता है' के लिए 10 दिनों तक शूट किया था। शेड्यूल 15 से 20 दिनों के लिए निर्धारित किया गया था, जो आधे से भी कम समय में पूरा हो गया था। सच में चीजों को देखने का उनका तरीका बहुत शानदार है'।
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मोहनलाल की अगली फिल्म में साथ किया है काम
मलयालम सुपरस्टार मोहनलाल ने भी उनकी तारीफ करते हुए कहा,'अपने काम से उन्होंने हमेशा लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया है। कला के प्रति उनका समर्पण जगजाहिर है। आप हमेशा और मजबूत होते जाएं और हमें ऐसे ही गौरवान्वित करते रहें'। बता दें कि मोहनलाल की बतौर निर्देशक आगामी फिल्म 'बैरोज' सिवन ने ही शूट की है।