बॉलीवुड मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान के बेटे जुनैद खान की पहली फिल्म 'महाराज' को ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने वाली थी, लेकिन फिल्म की कहानी की वजह से इस पर रोक लगा दी गई है। दरअसल, जुनैद खान की डेब्यू फिल्म रिलीज से पहले ही कानूनी पचड़े में फंस गई है। इस फिल्म को 14 जून को ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज किया जाना था, लेकिन गुजरात हाईकोर्ट ने इसकी रिलीज पर रोक लगा दी। आज इस मामले पर गुजरात हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है। अब इसकी ओटीटी रिलीज पर फिर से एक दिन की और रोक लगा दी गई है। फिलहाल, इसकी सुनवाई बुधवार के लिए टाल दी गई है।
फिल्म को लेकर वकील मुकुल रोहतगी ने क्या कहा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आमिर खान के बेटे जुनैद खान की डेब्यू फिल्म की रिलीज रोक मामले में दलील देते हुए वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि यह फिल्म साल 1862 के कोर्ट जजमेंट पर आधारित है। वकील ने यह भी कहा कि राइटर सौरभ शाह द्वारा लिखी किताब पर यह फिल्म आधारित है। याचिकाकर्ता ने इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी और किताब के खिलाफ अभीतक कोई कार्रवाई नहीं की है। वकील मुकुल ने आगे कहा कि याचिकाकर्ता को 1862 के फैसले और 2013 में लिखी किताब की जानकारी है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि याचिकाकर्ता की प्रार्थना बिल्कुल बेतुकी थी। उन्होंने यह भी कहा, अहमदाबाद के एक प्रमुख व्यवसायी ने उस किताब के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया, जिस पर फिल्म आधारित थी और ना ही इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया गया। आगे मुकुल ने कहा, किसी के लिए फिल्म बनाना, उसका निर्माण करना या उसे एक मंच पर रखना कोई छोटी बात नहीं होती है। इसमें बहुत सारा पैसा और मेहनत लगती है।
क्या है मामला
दरअसल, 14 जून को जुनैद खान की डेब्यू फिल्म 'महाराज' रिलीज होने वाली थी। रिलीज से एक दिन पहले यानी 13 जून को इस फिल्म की रिलीज पर रोक लगा दी गई। सामने आई रिपोर्ट्स में कहा गया कि 'महाराज' फिल्म पर हिंदू भावना को ठेस पहुंचाने का आरोप है। गुजरात हाईकोर्ट ने एक हिंदू समूह की याचिका के बाद जुनैद खान की पहली फिल्म 'महाराज' की रिलीज पर रोक लगा दी थी। इस याचिका में दावा किया गया कि फिल्म 'महाराज' हिंदू संप्रदाय के अनुयायियों के खिलाफ हिंसा भड़काएगी। इसलिए इसे रिलीज नहीं किया जाना चाहिए। याचिका में कहा गया कि हिंदू धर्म इसकी निंदा करता है क्योंकि इसमें भगवान कृष्ण के खिलाफ 'गंभीर रूप से निंदनीय बातें' हैं। साथ ही कहा गया कि अगर इस तरह की फिल्में रिलीज होती है, तो जाहिर है कि ये लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुचाएंगी। न्यायमूर्ति संगीता विशेन की एकल न्यायाधीश पीठ ने नेटफ्लिक्स और यशराज फिल्म्स और याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनीं और मामले को बुधवार को आगे की सुनवाई के लिए बढ़ा दिया है। कोर्ट ने कहा कि फिल्म की रिलीज पर रोक बुधवार तक जारी रहेगी।