एक खानाबदोश जनजाति और पिछड़े वर्ग से आकर, ट्रैवल एजेंट के रूप में करियर की शुरुआत करना और फिर अभिनेत्री के रूप में उनका इतना बड़ा मुकाम हासिल करना अपने आप में एक ऐसी कहानी है, जो हमेशा लोगों को प्रेरित करती रहेगी।
भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के सौ साल से भी ज्यादा के इतिहास में एक से बढ़कर एक कलाकार हुए और एक से बढ़कर कहानियां सुनने देखने को मिलीं। इस दौरान कई ऐसे कलाकार रहे, जिनकी अपनी निजी जिंदगी किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं रही। इन कलाकारों ने अपनी मेहनत और अपनी इच्छाशक्ति से सफलता की नई इबारत लिखी, जिससे कई लोगों को प्रेरणा मिली। ऐसी ही एक अभिनेत्री हैं उषा जाधव, जो मुख्य रूप से मराठी और हिंदी भाषा की फिल्मों में काम करती हैं।
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मिल चुका है सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार
उन्हें साल 2012 की मराठी फिल्म 'धग' में उनकी भूमिका के लिए जाना जाता है। इस फिल्म के लिए उन्हें 60वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था। इसके अलावा साल 2019 में, उन्हें 'माई घाट: क्राइम नंबर 103/2015' में उनके शानदार काम के लिए 50वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में सर्वश्रेष्ठ कलाकार का पुरस्कार (महिला) मिला था। उन्हें अब तक ऐसे कई अन्य पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।
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ट्रैवल एजेंट के रूप में शुरुआत कर हासिल किया बड़ा मुकाम
उषा जाधव ने अपनी यात्रा एक ट्रैवल एजेंट के रूप में की थी, लेकिन उनकी प्रतिभा ने उन्हें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव तक पहुंचाया। महाराष्ट्र के कोल्हापुर में कैकाडी खानाबदोश जनजाति में जन्मी और पली-बढ़ी जाधव ट्रैवल एजेंसी में नौकरी के लिए पुणे चली गईं, जहां कला के प्रति अपने जुनून के कारण, उन्होंने अपनी नौकरी जारी रखते हुए मुंबई का रुख किया। पिछड़ा वर्ग से आने के बावजूद से मुंबई और वैश्विक सिनेमा के बड़े पर्दे तक की उनकी यात्रा धैर्य और दृढ़ संकल्प की पर्याय रही है। अभिनेत्री ने इस दौरान अपनी इच्छा शक्ति और अपनी मेहनत के बलबूते बड़ा मुकाम हासिल किया है।
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अभिनेत्री ने अपने करियर के शुरुआती दिनों में कई विज्ञापनों में काम किया। फिल्मों में उनका पहला ब्रेक मधुर भंडारकर द्वारा निर्देशित साल 2007 में रिलीज हुई फिल्म 'ट्रैफिक सिग्नल' से मिला, जिसमें उन्हें ट्रैफिक सिग्नल पर सामान बेचने वाली लड़की की एक छोटी सी भूमिका निभाई थी। इसके बाद उन्होंने 2009 की फिल्म 'दो पैसे की धूप', 'चार आने की बारिश' में भी एक छोटी सी भूमिका निभाई। इसके बाद वह लगातार आगे बढ़ती गईं और इस दौरान 'अशोक च्रक', 'गाली', 'भूतनाथ रिटर्न', 'वीरप्पन', 'रीसेट' आदि कई फिल्मों में काम किया।
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