दिलीप कुमार, अटल बिहारी बाजपेयी
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लगातार दबाव पड़ने पर दिलीप कुमार ने इसके बाद उस समय के प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी से समय मांगा। बाजपेयी ने उन्हें मुलाकात के लिए बुला भी लिया। दोनों के बीच करीब आधा घंटे तक बातचीत चलती रही। और, इस मुलाकात के बाद दिलीप कुमार जब बाहर निकले तो उनके चेहरे पर संतोष तो था ही एक हिंदुस्तानी होने का फख्र भी था। तब देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था, ‘फिल्म स्टार दिलीप कुमार की देशभक्ति और देश के प्रति उनके समर्पण को लेकर कोई शक नहीं है।’
इसके अलावा वाजपेयी की तरफ से एक आधिकारिक बयान भी जारी किया गया। जिसके मुताबिक, दिलीप कुमार ने अपने पूरे फिल्मी करियर में देशभक्ति और देश के प्रति अपने समर्पण को साबित किया है। ये अब उनके ऊपर है कि वह व्यक्तिगत हैसियत में मिले इस पुरस्कार को रखना चाहते हैं कि नहीं। किसी को उनके ऊपर इसे वापस करने का दबाव नहीं बनाना चाहिए।”
इसी के बाद दिलीप कुमार ने ‘निशान ए इम्तियाज’ न लौटाने का फैसला किया। और, प्रधानमंत्री के बयान के बाद यहां मुंबई में शिवसेना के हौसले भी पस्त हो गए। इसके बाद फिर कभी किसी मसले पर दिलीप कुमार के ऊपर ‘निशान ए इम्तियाज’ को लेकर कोई तोहमत नहीं लगी। बताते हैं कि प्रधानमंत्री वाजपेयी से मुलाकात के लिए जो चिट्ठी दिलीप कुमार ने लिखी थी, उसमें उन्होंने लिखा, अगर इससे देश का हित होता है तो वह ‘निशान ए इम्तियाज’ लौटाने को तैयार हैं।