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पढ़िए, जेल जाने से पहले क्या कुछ हुआ संजय दत्त के घर

Tue, 21 May 2013 12:59 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
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संजय दत्त ने मुंबई की टाडा अदालत में शाम चार बजे समर्पण किया था। समर्पण करने से पहले संजय दत्त अपने घर में वे काम करते देखे गए जिससे संजय दत्त हमेशा से ही बचते रहे हैं।
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जेल में सेरेंडर करने वाली रात को संजय दत्त को नींद नहीं आयी। उनकी पूरी रात करवट बदलते हुए बीती। सुबह उठकर संजय दत्त गंभीर मूड में थे। घर पर संजय दत्त के अलावा उनकी पत्नी मान्यता, दोनों बहनें और दामाद थे।

पूजा करने गए संजय दत्त

आमतौर पर पूजा घर में जाने से बचने वाले संजय दत्त उस दिन पूजा करने गए। उनकी यह पूजा लंबी चली। पूजा करके निकलने के बाद उन्होंने मान्यता से कुछ धार्मिक पुस्तकें जेल में साथ ले जाने के लिए मांगी।
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फिल्मकार महेश भट्ट उस दिन पूरे दिन संजय दत्त के साथ थे। टीवी चैनलों से बात करते हुए महेश भट्ट ने कहा कि उस दिन मैने नए संजय दत्त को देखा। आमतौर पर किसी के आगे सर न झुकाने की बात कहना वाला संजय आज बिल्कुल अलग मिजाज में था।

घर का माहौल बिल्कुल अलग था। लोग संजय को अकेला नहीं छोड़ना चाहते थे। साथ ही हर कोई रोकर खुद को हल्का भी करना चाहता था।

क्रिकटरों जैसा बनाया गोला

जेल जाने से कुछ पहले परिवार के सभी सदस्यों ने एक गोला बनाया। वैसा ही गोला जैसे क्रिकेटर क्रिकेट के मैदान में विकेट लेने के बाद आगे की रणनीति तय करने के लिए बनाते हैं।

इस गोले में उनका पूरा परिवार खड़ा हुआ। सभी ने संजय को इस बात के लिए ढाढंस बंधाया कि यह हमारे लिए एक बुरा वक्त है। इस बुरे वक्त के बाद एक अच्छा वक्त भी आया।

नौकर से लिपट कर रोए

परिवार के लोगों से मिलने के बाद संजय दत्त अपने घरेलू नौकरों से मिलें। किचन में काम करने वाला बावर्जी सुबह से ही सुबक रहा था। जब संजय चुपके से किचन में पहुंचे तो वह उनसे लिपट कर फूट-फूटकर रोने लगा।

नौकर को रोता देख संजय ने उसे समझाया जरूर लेकिन वह खुद भी उसको चुप कराते-कराते रोने लगे। पूरे घर का माहौल उस समय एक अजीब से कष्ट से भर गया।

गाड़ी में खामोश ही रहे संजय

टाडा अदालत में सेरेंडर करने के लिए जब गाड़ियों का काफिला निकला तो संजय दत्त चुप ही रहे। वह इस बात से भी डरे हुए थे कि वह मीडिया का सामना कैसे करेंगे।

मीडिया की कई गाड़ियां उनकी गाड़ी के पीछे-पीछे भी चल रही थीं। टाडा अदालत में मीडिया की इतनी ज्यादा भीड़ थी कि गाड़ी का गेट खुलते ही नहीं बन रहा था।

महेश भट्ट कहते हैं कि सेरेंडर का टाइम खत्म हो रहा था और हम में एक घबराहट आती जा रही थी। हमें लग रहा था कि कोई आए और कह दे कि संजय को जेल नहीं होगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और संजय को सेरेंडर करना पड़ा।
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