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मॉडलों को फेल करते ये ट्रांसजेंडर

Thu, 26 May 2016 02:43 PM IST
गीता पांडे /बीबीसी संवाददाता
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ट्रांसजेंडर मॉडल - फोटो : BBC
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दक्षिण भारत के राज्य केरल की एक डिजाइनर ने साड़ियों के अपने नए कलेक्शन के लिए दो ट्रांसजेंडर्स को मॉडल चुना है। शर्मिला ने अपने इस नए कलेक्शन को नाम दिया है मझाविल या इंद्रधनुष- और ये ट्रांसजेंडर समुदाय को समर्पित है, क्योंकि दुनियाभर में ये इंद्रधनुषी झंडा ही उनका प्रतिनिधित्व करता है।
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भारत में, जहाँ ट्रांसजेंडर लोगों को समाज में नीची निगाह से देखा जाता है। उनका मजाक बना कर  उनसे कन्नी काटी जाती है, वहाँ शर्मिला का ट्रांसजेंडर को मॉडल चुनना लोगों का ख़ासा ध्यान आकर्षित करता है। ये मॉडल हैं- माया मेनन और गोवरी सावित्री। उन्हें मॉडलिंग का कोई अनुभव नहीं है। शर्मिला का कहना है कि सामाजिक संस्था क़रीला के ज़रिए वो इन दोनों के संपर्क में आईं।क़रीला केरल में एलजीबीटी समुदाय के लिए काम करने वाली संस्था है।

शर्मिला ने कोचीन से बीबीसी से फ़ोन पर बातचीत में कहा, “मैं सोच ही रही थी कि हैंडलूम साड़ियों के अपने इस नए कलेक्शन को कैसे पेश करूँगी और तभी मुझे फ़ेसबुक पर राज्य सरकार की एक पोस्ट नज़र आई जिसमें ट्रांसजेंडरों का जीवन संवारने की नई नीति का जिक्र था। उन्होंने कहा, “मैंने सोचा कि जब सरकार एलजीबीटी लोगों के लिए इतना कुछ कर रही है, तो मुझे भी कुछ करना चाहिए।”
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शर्मिला ने कभी भी पेशेवर मॉडल्स के साथ काम नहीं किया है। शर्मिला ने बताया कि अपने हाल के अभियान के लिए मॉडलों का चुनाव करते वक्त वह दो चीजों पर ध्यान दे रही थी। उन्होंने कहा, “हम ऐसे मॉडल्स की तलाश में थे जिन्हें साड़ियां पहनना पसंद हो और जो कैमरे के सामने सहज हों।

हम नहीं चाहते थे कि वे पोज़ बनाएं। माया और गोवरी ट्रांसजेंडर महिलाएं हैं जिनका शरीर पुरुष जैसा है। डिजाइनर ने बताया कि इन ट्रांसजेंडर मॉडलों ने अपनी तस्वीरें तो साड़ियों में भेजी थी लेकिन जब वो उनसे मिलीं तो उन्होंने मर्दाना पोशाक पहन रखी थी, कमीज और पैंट।

शर्मिला ने कहां जब हमने उन्हें अपने अभियान के लिए साड़ियों में तैयार किया तो वे एकदम वो शानदार लग रहीं थीं। 25 वर्षीय नायर रेड लोटस के नाम से साड़ियां बेच रही हैं और उन्होंने इसे सात महीने पहले लॉन्च किया है। वो कहती हैं मेरे पति केरल से हैं। लेकिन वो लंबे समय तक तमिलनाडु में रही है। 
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देश में जहाँ ट्रांसजेंडरों को समाज में हाशिए पर रखा जाता है

ट्रांसजेंडर मॉडल - फोटो : BBC
मैंने उनके परिवार से उस तमिल कहावत के बारे में सुना कि लाल कमल के फूल के रेशे से देवी देवताओं के लिए कपड़े तैयार किए जाते थे। इसीलिए मैंने अपनी कंपनी का नाम इस फूल के नाम पर रखा। चमकदार साड़ियों और इसमें लिपटी मॉडल को खासी प्रतिक्रियाएं मिलीं और शर्मिला ने बताया।

कि देशभर से ही नहीं, विदेशों से भी साड़ियों के ऑर्डर मिल रहे हैं। ये साड़ियां पड़ोसी राज्य कर्नाटक के हुबली ज़िले के एक छोटे से गांव के बुनकर तैयार करते हैं और इनकी क़ीमत 1,500 से 2,500 रुपए के बीच है।

शर्मिला कहती हैं। पिछले दो हफ्ते में हम 100 से अधिक साड़ियां बेच चुके हैं। भारत के अलावा हमें बड़ी संख्या में ब्रिटेन, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया और अमरीका से भी ऑर्डर मिले हैं। ट्रांसजेंडर्स को मॉडल चुनने के शर्मिला के फैसले से सभी खुश हों ऐसा नहीं है।

कुछ लोगों का कहना है कि सिर्फ़ प्रचार हासिल करने के इरादे से ऐसा किया गया है। लेकिन ऐसे देश में जहाँ ट्रांसजेंडरों को समाज में हाशिए पर रखा जाता है, वे शादियों, बच्चे के जन्म में नाचने गाने, भीख मांगने और देहव्यापार तक सीमित हैं। 

शर्मिला ट्रांसजेंडर्स को मॉडल चुनने के अपने फ़ैसले को सही ठहराती हैं। वह कहती हैं। 29 साल की ये दोनों मॉडल स्नातक हैं लेकिन उनके पास नौकरी नहीं है। और इसकी वजह है उनका ट्रांसजेंडर होना। शर्मिला का कहना है। कि इस अभियान से वे एक अलग रूप में दिखेंगी और मैं उम्मीद करती हूँ। कि समाज में उनकी स्वीकार्यता बढ़ेगी और उन्हें रोजगार मिल सकेगा।
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