फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

स्मृति शेष: पढ़ाई में बहुत होशियार थे सुशांत, मगर बीटेक पूरी करने की इच्छा रह गई अधूरी

Mon, 15 Jun 2020 05:08 AM IST
Mishra Mishra एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
सुशांत सिंह राजपूत - फोटो : Social Media
विज्ञापन

दिल्ली इंजीनियरिंग कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल, दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के संस्थापक व कुलपति और वर्तमान में एमिटी, ग्रुरुगाम के कुलपति प्रो. पीबी शर्मा कहते हैं कि सुशांत सिंह राजपूत अभिनय ही नहीं, पढ़ाई में भी बेहद होशियार और जिंदादिल थे। दिल्ली इंजीनियरिंग कॉलेज (वर्तमान में दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय) के प्रिंसिपल होने के नाते अक्सर उन छात्रों के चेहरे याद रह जाते हैं, जो पढ़ाई के चलते खास हों। सुशांत का नाम हमेशा इसलिए याद रहा, क्योंकि उन्होंने दिल्ली इंजीनियरिंग कॉलेज की दाखिला प्रवेश परीक्षा में देशभर में सातवां स्थान हासिल किया था। इसके अलावा इंजीनियरिंग दाखिले के लिए आयोजित होने वाली AIEEE में भी अच्छी रैंक आई थी। यही नहीं, सुशांत ने फिजिक्स में नेशनल ओलंपियाड भी जीता था। सुशांत ने 2003 में करीब 17 से अधिक दाखिला प्रवेश परीक्षा पास की थी। हालांकि इंडियन स्कूल ऑफ माइंस के बजाय सुशांत दिल्ली इंजीनियरिंग कॉलेज में मेकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक करने पहुंचे। प्रो. शर्मा कहते हैं कि दिल्ली इंजीनियरिंग कॉलेज में वे 2003 से 2006 तक ही रहे।  इन तीन सालों में पढ़ाई से लेकर कैंपस फेस्ट में सबसे आगे बढ़कर शिरकत करना, हर किसी के साथ जिंदादिली, मुस्कराते हुए बात करते थे। इसलिए आज हर उस पूर्व छात्र, शिक्षकों की आंखें नम हैं, क्योंकि विश्वास ही नहीं हो रहा कि अब सुशांत नहीं रहे।

विज्ञापन

सुशांत सिंह राजपूत - फोटो : सोशल मीडिया
अभी फरवरी में मिले तो कहा, बीटेक की डिग्री पूरी करनी है
डीटीयू में डिपार्टमेंट ऑफ डिजाइन के प्रो.रंगानाथ एम सिंगारी ने कहा, कैंपस में जैसे ही सुशांत की मौत की खबर मिली तो एक बार विश्वास ही नहीं हुआ। अभी फरवरी में उनसे मिलना हुआ, जब वे कैंपस आए थे। वे अपनी अधूरी बीटेक डिग्री पूरी करना चाहते थे। इसके लिए उन्हें आवेदन करना था, लेकिन कोविड-19 शुरू हो गया। वर्ष 2003 में  इंजीनियरिंग ड्राइंग, वर्कशाप टेक्नोलॉजी, मैन्यूफैक्चरिंग प्रोसेस पर अक्सर सुशांत से बात होती थी। हालांकि उन दिनों उन्हें अभिनय की दुनिया का आकर्षण होने लगा था। चार वर्षीय बीटेक डिग्री पूरी होने से पहले ही तीसरे साल उन्होंने श्यामक डावर को डांसिंग ऑडिशन के बाद मुंबई की तरफ रुख कर लिया। सुशांत बेहद हंसमुख था। वे आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठा सकते थे। इसलिए इस पूरे मामले की जांच बेहद जरूरी है।
विज्ञापन

सुशांत सिंह राजपूत - फोटो : Social Media
मैगी बाबा से लेकर कैंपस विजिट नहीं भूल सकते
देहरादून में ईरा ग्राफिक यूनिवर्सिटी के प्रो. विनय शर्मा (पूर्व छात्र) बताते हैं कि मैगी बाबा की दिल्ली इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों से बहुत पुरानी दोस्ती है। क्योंकि रात को जब पढ़ाई करते हुए थक जाते या भूख लगती तो वे ही एकमात्र ऐसे थे, जोकि छात्रों से बातें करते हुए मैगी के साथ-साथ चाय पिलाते थे। इसलिए जब  2018  में सुशांत कैंपस (नए और पुराने) आए थे तो विभागों, शिक्षकों से लेकर मैगी बाबा से भी मुलाकात की। बाबा के हाथ की मैगी भी खाई थी। सुशांत की मौत से सब दुखी हैं। क्योंकि उनके जैसा हंसमुख और जिंदादिल इंसान कभी आत्महत्या नहीं कर सकता है।

अधूरी रह गईं सुशांत सिंह राजपूत की ख्वाहिशें, फैंस के साथ साझा की थी अपनी 'विश लिस्ट'

 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें