दिल्ली इंजीनियरिंग कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल, दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के संस्थापक व कुलपति और वर्तमान में एमिटी, ग्रुरुगाम के कुलपति प्रो. पीबी शर्मा कहते हैं कि सुशांत सिंह राजपूत अभिनय ही नहीं, पढ़ाई में भी बेहद होशियार और जिंदादिल थे। दिल्ली इंजीनियरिंग कॉलेज (वर्तमान में दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय) के प्रिंसिपल होने के नाते अक्सर उन छात्रों के चेहरे याद रह जाते हैं, जो पढ़ाई के चलते खास हों। सुशांत का नाम हमेशा इसलिए याद रहा, क्योंकि उन्होंने दिल्ली इंजीनियरिंग कॉलेज की दाखिला प्रवेश परीक्षा में देशभर में सातवां स्थान हासिल किया था। इसके अलावा इंजीनियरिंग दाखिले के लिए आयोजित होने वाली AIEEE में भी अच्छी रैंक आई थी। यही नहीं, सुशांत ने फिजिक्स में नेशनल ओलंपियाड भी जीता था। सुशांत ने 2003 में करीब 17 से अधिक दाखिला प्रवेश परीक्षा पास की थी। हालांकि इंडियन स्कूल ऑफ माइंस के बजाय सुशांत दिल्ली इंजीनियरिंग कॉलेज में मेकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक करने पहुंचे। प्रो. शर्मा कहते हैं कि दिल्ली इंजीनियरिंग कॉलेज में वे 2003 से 2006 तक ही रहे। इन तीन सालों में पढ़ाई से लेकर कैंपस फेस्ट में सबसे आगे बढ़कर शिरकत करना, हर किसी के साथ जिंदादिली, मुस्कराते हुए बात करते थे। इसलिए आज हर उस पूर्व छात्र, शिक्षकों की आंखें नम हैं, क्योंकि विश्वास ही नहीं हो रहा कि अब सुशांत नहीं रहे।