चाय की दुकान पर आया आइडिया
इस गाने को बनाने के पीछे का किस्सा कुछ यूं है कि, इसको कंपोज करने की जिम्मेदारी संगीतकार जोड़ी शंकर-जयकिशन को मिली थी और लिखने का जिम्मा उस दौर के दो बेहतरीन गीतकारों हसरत जयपुरी और शैलेन्द्र को। चारों की जोड़ी रोज गाने पर काम करने के लिए खंडाला जाते थे। इस दौरान हाइवे पर एक छोटी सी दुकान पड़ती थी, जिसपर वह चाय-नाश्ते के लिए रुकते थे। वहां पर एक वेटर था, जिसका नाम रमैया था, जो कि तेलुगू था। शंकर हैदराबाद में बड़े हुए थे तो उनको तेलुगू आती थी, ऐसे में वह हमेशा तेलुगू में ही चाय-नाश्ते का ऑर्डर देते थे।
इसे भी पढ़ें- Jawan: मुंबई के गेयटी गैलेक्सी में पहली बार सुबह 6 बजे होगी जवान की स्क्रीनिंग, शाहरुख के फैनक्लब ने की घोषणा
सुर-ताल के साथ ऐसे बना गाना
एक दिन चारों उसी दुकान में इकट्ठे थे और शंकर रमैया को आवाज लगा थे, लेकिन वह किसी दूसरी टेबल पर था तो वहां नहीं आया। ऐसे में शंकर ने कहा- वस्तावैया। तेलुगू में वस्तावैया का अर्थ होता है आएगा या नहीं। उनके कहने का अर्थ था कि रमैया आएगा या नहीं...रमैया वस्तावैया। रमैया को जल्दी बुलाने के इंतजार में शंकर ने गुनगुनाना शुरू कर दिया रमैया वस्तावैया...रमैया वस्तावैया। शंकर गा रहे थे तो बिना संगीत के गाना जम नहीं रहा था, ऐसे में जयकिशन ने वहीं बैठे-बैठे टेबल पर ताल देनी शुरू कर दी। लेकिन फिर भी गाना अधूरा ही लग रहा था तो शैलेन्द्र ने इसके आगे जोड़ दिया, 'मैंने दिल तुझको दिया।'
राज कपूर ने गाने के लिए क्रिएट किया थी सिचुएशन
जब तक रमैया ऑर्डर लेने आता तब तक चारों ने सोच लिया था कि यह एक अच्छा गाना बन सकता है तो उन्होंने इसके बारे में राज कपूर को बताया और ये लाइनें सुनाईं। राज कपूर को यह पसंद आया। लेकिन समस्या यह थी कि रमैया वस्तावैया तेलुगू था तो हिंदी भाषियों को समझ में नहीं आता। तब उन्होंने सोचा कि इसे हिंदी से जोड़ते हैं, लेकिन रमैया वस्तावैया ही उस धुन पर एकदम फिट बैठ रहा था, कुछ और जोड़ने पर मजा नहीं आ रहा था। तब फिल्म श्री420 में राज कपूर ने इस गाने के लिए खास सीन क्रिएट किया और इसे बनाया गया।