सलीम खान ने कहा कि धर्मेंद्र, देवानंद और दिलीप कुमार ने स्क्रिप्ट पास कर दी थी, इसलिए यह अमिताभ बच्चन के पास गई। उस समय कोई भी अभिनेत्री फिल्म में मुख्य नायिका का अभिनय करने के लिए तैयार नहीं थी, इसलिए जया बच्चन का दरवाजा खटखटाया गया और उनसे इस फिल्म में अभिनय करने को कहा। सलीम खान ने कहा कि मैंने इस फिल्म में जया बच्चन को लेने का सुझाव दिया। जब उन्हें कहानी सुनाई गई तो उन्होंने कहा कि मेरे करने के लिए इस फिल्म में कुछ नहीं है, तब मैंने कहा हां, आपके यहां करने के लिए बहुत कुछ नहीं है, लेकिन यह फिल्म अमिताभ का करियर बदल सकती है।
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सलीम खान ने कहा कि उन्हें अमिताभ बच्चन की एक्टिंग पर इतना भरोसा था कि वह हर मोड़ पर उनके नाम को आगे बढ़ाते रहें, लेकिन अलग होने के बाद दोनों एक दूसरे के संपर्क में नहीं रहे। अमिताभ बच्चन के साथ अपने रिश्ते को याद करते हुए सलीम खान ने कहा यह जो रिश्ता रखने की जिम्मेदारी थी, वह उन पर यानी अमिताभ बच्चन पर थी। आप जब बड़े स्टार हो जाते हैं तो आपके जिम्मेदारी होती है कि मिलना जुलना हो। रिश्ता रखना आपका फर्ज बनता है, जो अमिताभ बच्चन ने शायद किसी वजह से नहीं किया।
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साल 1989 की फिल्म 'तूफान' में सलीम और जावेद के अलग होने के बाद अमिताभ और सलीम ने फिर से एक साथ काम किया। एक बार फिर वह दोनों मिले लेकिन सिर्फ व्यावसायिक तौर पर, वह कभी दोस्त के रूप में नहीं मिले। सलीम ने कहा कि मैंने कभी यह दावा नहीं किया कि हम बहुत करीबी दोस्त हैं। सिर्फ हमारे साथ ही नहीं, अमिताभ बच्चन का स्वभाव हर किसी के साथ ऐसा था। वह कभी किसी को अपने करीब नहीं आने देते थे। हम सब ने पेशेवर रूप से काम किया और अच्छा काम किया।
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