अंजना वेलफेयर सोसायटी के सहयोग से रिदम कला महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस महोत्सव के दौरान संगीत एवं नृत्य की कार्यशाला आयोजित की जा रही है। 26 जनवरी से शुरू हुआ यह कला महोत्सव 45 दिन तक आयोजित किया जाएगा। यह कला महोत्सव बीते 8 सालों से आयोजित किया जा रहा है। इस महोत्सव के तहत हर सप्ताहांत में कला के क्षेत्र से जुड़े व्यक्ति इस महोत्सव के तहत आयोजित होने वाली कार्यशाला का हिस्सा बनते हैं।
सवाल: आप किताब अपराजिता में एक तरफ पौराणिक कथाओं और शक्ति की बात करते हैं। दूसरी तरफ इसी विचार को आप पश्चिम से जोड़ देते हैं। ऐसा कैसे और क्यों करते हैं?
सवाल: महिला सशक्तिकरण की बात करें तो मीरा एक बहुत मजबूत महिला थीं। आप मीरा को कैसे देखते हैं। उन्होंने कई प्रथाओं को तोड़ा और कला से पहचान बनाई। मीरा की आज की नारी से कैसे तुलना करते हैं?
जवाब: मै मीरा का बहुत सम्मान करता हूं। मीरा समाज द्वारा स्त्री के लिए खींचे गए ढांचे से इंकार करती हैं। मीरा मध्यकालीन समय में समाज के बंदिशों के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहीं थीं। वर्तमान में स्त्री को बांध दिया गया है। आोशा की जाती है कि वो एक पत्नी और मां की भूमिका में दिखें। मीरा ने इस दोनों भूमिका से इंकार कर दिया। वहीं राधा प्रेम की मूर्ति हैं। वो भी किसी उपाधी से मुक्त हैं। सीता और पार्वती प्रेमिका के साथ पत्नी भी हैं लेकिन मीरा और राधा के पास सिर्फ प्रेम हैं। उपाधि मुक्त प्रेम सरल नहीं होता है।
जवाब: समाज में एक दम सबकुछ नहीं बदल जाता है।धीरे-धीरे चीजें बदल रही हैं। हम सौभाग्यशाली हैं कि हम सशक्त लोकतंत्र में रह रहे हैं, जहां हम लोगों को स्वीकार करते हैं। अभी कुछ जगह रोक-टोक और बंधन हैं लेकिन ये भारतीय परंपरा और लोकतंत्र की खूबसूरती है कि हम अपनी बात रख सकते हैं। स्त्रियां भी अपनी बात रख रही हैं। सबसे बड़ी शक्ति प्रश्न पूछने की होती है। स्त्रियां आज सवाल पूछ सकती हैं।