कम लोगों को ही पता होगा कि हिंदी सिनेमा में के सी बोकाडिया और रजनीकांत का रिश्ता अलग ही स्तर का रहा है। बोकाडिया ने उन्हें लेकर ‘त्यागी’, ‘फूल बने अंगारे’, ‘असली नकली’, ‘इंसाफ कौन करेगा’ और ‘इंसानियत के देवता’ नामक पांच फिल्में बनाई हैं। इन पांचों फिल्मों में बोकाडिया ने रजनीकांत को उनके अभिनय के अलहदा रंगों के साथ साथ अलग अलग चमक के साथ पेश किया। हिंदी सिनेमा में रजनीकांत की शोहरत को एक अलग स्तर तक ले जाने वाली फिल्म ‘फूल बने अंगारे’ आज भी ओटीटी और टेलीविजन पर ब्लॉकबस्टर फिल्म बनी हुई है।
रजनीकांत की यादों के बारे में बात करने पर के सी बोकाडिया ज्यादा कुछ कहते नहीं हैं। वह कहते हैं, “जो दिल के करीब होते हैं, उनसे दिल का रिश्ता होता है और दिल के रिश्ते सार्वजनिक चर्चाओं के लिए नहीं होते हैं। मैंने और रजनीकांत ने बहुत लंबा वक्त साथ बिताया है। हमने साथ खाना खाया है। साथ सफर किया है और साथ ही जीवन के आनंद भी लिए हैं। वह एक बहुत ही शालीन, जमीन से जुड़े और बड़ों का सम्मान करने वाले इंसान हैं।”
तब के बैंगलोर में 12 दिसंबर 1950 को जन्मे रजनीकांत का असली नाम शिवाजी राव गायकवाड़ है। रजनीकांत की शोहरत में अमिताभ बच्चन की फिल्मों का बड़ा हाथ रहा है। अमिताभ बच्चन की एक दर्जन से ज्यादा हिट फिल्मों की रीमेक में रजनीकांत ने काम किया है और इसी के चलते दोनों का रिश्ता भी बहुत करीब का बना रहा है। रजनीकांत ने कई मौकों पर ये माना भी कि बिग बी की जिन फिल्मों के रीमेक में वह हीरो बने, उन्होंने ही उन्हें स्टारडम दिलाया। के सी बोकाडिया ने रजनीकांत के अलावा अमिताभ बच्चन को भी निर्देशित किया है।