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Nikamma Movie Review: चार चांद लगाने से चूकीं शिल्पा, दो अभिमन्यु भी नहीं तोड़ पाए बॉक्स ऑफिस का चक्रव्यूह

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'निकम्मा' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला
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Movie Review
निकम्मा
कलाकार
शिल्पा शेट्टी , अभिमन्यु दासानी , शर्ली सेतिया , अभिमन्यु सिंह और सचिन खेडेकर
लेखक
वेणु श्रीराम , साबिर खान और सनमजीत सिंह तंवर
निर्देशक
साबिर खान
निर्माता
सोनी पिक्चर्स इंटरनेशनल और साबिर खान फिल्म्स
रिलीज
17 जून 2022
रेटिंग
1.5/5

20 साल पुराना गाना। पांच साल पुरानी फिल्म की रीमेक और दो साल से रिलीज का इंतजार करती फिल्म। अपने जमाने में लाखों दिलों की धड़कन रहीं अभिनेत्री भाग्यश्री के बेटे अभिमन्यु दासानी की नई फिल्म ‘निकम्मा’ दक्षिण की हिट फिल्म की एक कमजोर रीमेक है। ‘एमसीए’ यानी ‘मिडिल क्लास अब्बायी’ नाम से 2017 में रिलीज हुई नानी और साई पल्लवी की फिल्म की इस रीमेक से ये भी पता चलता है कि हिंदी सिनेमा वाकई कितना आलसी हो चला है। कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा, भानुमती ने कुनबा जोड़ा, कैटेगरी की फिल्म ‘निकम्मा’ करीब ढाई घंटे के समय की ऐसी बर्बादी है जिसका दोष सिर्फ और सिर्फ इस फिल्म से पहले इसके धुआंधार प्रचार को ही दिया जा सकता है।

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शिल्पा शेट्टी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
बेअसर रही शिल्पा की वापसी
47 साल की हो चुकीं शिल्पा शेट्टी ही फिल्म ‘निकम्मा’ देखने आए गिनती के दर्शकों के लिए फिल्म देखने का मुख्य कारण रहीं। फिल्म की पटकथा बहुत ही कमजोर है। फोकस में देवर भाभी का रिश्ता है। लेकिन, वैसा नहीं जैसा ‘नदिया के पार’ या इसकी रीमेक ‘हम साथ साथ हैं’ में लोग देख चुके हैं। यहां देवर के जीवन में अपना कोई उद्देश्य नहीं है। फिल्म का नाम ही उसके किरदार पर है। भाभी परिवहन विभाग की अफसर है। दोनों की बनती नहीं है। बीच बीच में कहानी को लव स्टोरी बनाने की कोशिश भी चलती रहती है और फिर जरूरत आ जाती है जब देवर को अपना धर्म निभाना है। उसे भाभी की लक्ष्मण रेखा बनना है। कहानी बुरी नहीं है। तेलुगू में ये सुपरहिट भी रही है। लेकिन, इसका हिंदी रूपांतरण खोखला और बहुत ही नकली टाइप दिखता है।

 

'निकम्मा' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
रीमेक के मास्टर भी चूके
फिल्म ‘निकम्मा’ के निर्देशक साबिर खान का रिपोर्ट कार्ड उनकी फिल्मों ‘कमबख्त इश्क’, ‘हीरोपंती’ और ‘बागी’ तक ठीक ही रहा। फिर ‘मुन्ना माइकल’ ने उनका रास्ता काट दिया। ‘कमबख्त इश्क’ तमिल फिल्म ‘पम्मल के संबंधम’ की रीमेक है। ‘हीरोपंती’ साबिर ने तेलुगू फिल्म ‘पारुगु’ की रीमेक के तौर पर बनाई और उनकी तीसरी फिल्म ‘बागी’ तेलुगू फिल्म ‘वर्षम’ की रीमेक रही। एक तरह से देखा जाए तो साबिक रीमक के मास्टर रहे हैं। पर इस बार फिल्म ‘निकम्मा’ में उनका दांव सही नहीं बैठा। दो साल से रिलीज की राह तकती रही इस फिल्म में ऐसा कुछ नहीं है जिसे देखने के लिए दर्शकों को सिनेमाघरों में आने का उत्साह बन सके। ओरीजनल कहानी का तिया पांचा भी उन्होंने ही किया है और अभिमन्यु दासानी को एक्शन हीरो बनाने का दांव भी उनका उल्टा ही पड़ा।

'निकम्मा' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
देवर, भाभी के रिश्तों का रोड़ा
शिल्पा शेट्टी की कमबैक फिल्म के रूप में प्रचारित फिल्म ‘निकम्मा’ से पहले शिल्पा अपनी किस्मत फिल्म ‘हंगामा 2’ में भी ट्राई कर चुकी हैं, लेकिन मां के रोल करने की उम्र में अभिमन्यु की भाभी का किरदार भी ठीक ही होता अगर देवर, भाभी का ये एंगल ढंग से विकसित किया गया होता। साबिर को तेलुगू फिल्म ‘एमसीए’ का हिंदी रूपांतरण बनाने से पहले इस रिश्ते पर बनी कुछ और हिंदी फिल्में देखनी चाहिए थीं। वह हिंदी फिल्मों के दर्शकों को एक ऐसा कल्पनालोक बेच रहे हैं जिसके कलाकारों का दर्शकों से कोई कनेक्ट ही नहीं बन पा रहा है। अभिमन्यु दासानी बड़े परदे के हीरो लायक भरोसा खुद पर ही नहीं ला पा रहे हैं। वह भाग्यश्री के बेटे की वजह से फिल्में पा रहे हैं, इसमें कोई शक नहीं है। लेकिन, कामयाबी उन्हें अपनी मेहनत से ही मिलेगी। एक्शन वह अच्छा करते हैं। नाचते भी ठीक ठाक हैं। लेकिन, उनके अभिनय का सबसे कमजोर पहलू उनके चेहरे पर परिस्थिति के अनुसार भावों का न बदलना है।
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'निकम्मा' रिव्यू - फोटो : सोशल मीडिया
देखें कि न देखें
ये फिल्म ‘निकम्मा’ की पटकथा की ही कमजोरी है कि शिल्पा शेट्टी और अभिमन्यु दासानी के अलावा बाकी कलाकार भी कोई असर नहीं छोड़ पाते हैं। शर्ली सेतिया के डेब्यू लायक ये फिल्म है नहीं और अभिमन्यु सिंह के पास बतौर अभिनेता अब कुछ नया दिखाने लायक बचा नहीं है। फिल्म के बाकी कलाकार भी बस टाइमपास सा करते ही दिखते हैं। फिल्म का संगीत इसकी एक और बड़ी कमजोरी है। रीमिक्स गाने ‘निकम्मा किया इस दिल ने’ का असर भी सिनेमा हॉल से बाहर निकलने के बाद बाकी नहीं रह जाता। फिल्म समय और पैसे दोनों की बर्बादी है, इसे ना देखना ही बेहतर।
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