रीमेक के मास्टर भी चूके
फिल्म ‘निकम्मा’ के निर्देशक साबिर खान का रिपोर्ट कार्ड उनकी फिल्मों ‘कमबख्त इश्क’, ‘हीरोपंती’ और ‘बागी’ तक ठीक ही रहा। फिर ‘मुन्ना माइकल’ ने उनका रास्ता काट दिया। ‘कमबख्त इश्क’ तमिल फिल्म ‘पम्मल के संबंधम’ की रीमेक है। ‘हीरोपंती’ साबिर ने तेलुगू फिल्म ‘पारुगु’ की रीमेक के तौर पर बनाई और उनकी तीसरी फिल्म ‘बागी’ तेलुगू फिल्म ‘वर्षम’ की रीमेक रही। एक तरह से देखा जाए तो साबिक रीमक के मास्टर रहे हैं। पर इस बार फिल्म ‘निकम्मा’ में उनका दांव सही नहीं बैठा। दो साल से रिलीज की राह तकती रही इस फिल्म में ऐसा कुछ नहीं है जिसे देखने के लिए दर्शकों को सिनेमाघरों में आने का उत्साह बन सके। ओरीजनल कहानी का तिया पांचा भी उन्होंने ही किया है और अभिमन्यु दासानी को एक्शन हीरो बनाने का दांव भी उनका उल्टा ही पड़ा।
देवर, भाभी के रिश्तों का रोड़ा
शिल्पा शेट्टी की कमबैक फिल्म के रूप में प्रचारित फिल्म ‘निकम्मा’ से पहले शिल्पा अपनी किस्मत फिल्म ‘हंगामा 2’ में भी ट्राई कर चुकी हैं, लेकिन मां के रोल करने की उम्र में अभिमन्यु की भाभी का किरदार भी ठीक ही होता अगर देवर, भाभी का ये एंगल ढंग से विकसित किया गया होता। साबिर को तेलुगू फिल्म ‘एमसीए’ का हिंदी रूपांतरण बनाने से पहले इस रिश्ते पर बनी कुछ और हिंदी फिल्में देखनी चाहिए थीं। वह हिंदी फिल्मों के दर्शकों को एक ऐसा कल्पनालोक बेच रहे हैं जिसके कलाकारों का दर्शकों से कोई कनेक्ट ही नहीं बन पा रहा है। अभिमन्यु दासानी बड़े परदे के हीरो लायक भरोसा खुद पर ही नहीं ला पा रहे हैं। वह भाग्यश्री के बेटे की वजह से फिल्में पा रहे हैं, इसमें कोई शक नहीं है। लेकिन, कामयाबी उन्हें अपनी मेहनत से ही मिलेगी। एक्शन वह अच्छा करते हैं। नाचते भी ठीक ठाक हैं। लेकिन, उनके अभिनय का सबसे कमजोर पहलू उनके चेहरे पर परिस्थिति के अनुसार भावों का न बदलना है।
देखें कि न देखें
ये फिल्म ‘निकम्मा’ की पटकथा की ही कमजोरी है कि शिल्पा शेट्टी और अभिमन्यु दासानी के अलावा बाकी कलाकार भी कोई असर नहीं छोड़ पाते हैं। शर्ली सेतिया के डेब्यू लायक ये फिल्म है नहीं और अभिमन्यु सिंह के पास बतौर अभिनेता अब कुछ नया दिखाने लायक बचा नहीं है। फिल्म के बाकी कलाकार भी बस टाइमपास सा करते ही दिखते हैं। फिल्म का संगीत इसकी एक और बड़ी कमजोरी है। रीमिक्स गाने ‘निकम्मा किया इस दिल ने’ का असर भी सिनेमा हॉल से बाहर निकलने के बाद बाकी नहीं रह जाता। फिल्म समय और पैसे दोनों की बर्बादी है, इसे ना देखना ही बेहतर।