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NCPCR: बच्चों पर बुरा असर डाल रहा उल्लू एप! एनसीपीसीआर ने सूचना मंत्रालय को पत्र लिख की कार्रवाई की मांग

Sun, 03 Mar 2024 09:27 PM IST
रुपाली रामा जायसवाल एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

एनसीपीसीआर ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना मंत्रालय को पत्र लिखकर ऐसे एप्स को नियंत्रित करने वाले नियमों और नीति प्रमाणन के संबंध में जानकारी प्रदान करने का अनुरोध किया है।
 
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एनसीपीसीआर-उल्लू एप - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने सरकार को उल्लू एप के खिलाफ जांच करने और उचित कार्रवाई करने की सिफारिश की है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि एप अपने ग्राहकों को अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री वितरित कर रहा है। एनसीपीसीआर ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना मंत्रालय को पत्र लिखकर ऐसे एप्स को नियंत्रित करने वाले नियमों और नीति प्रमाणन के संबंध में जानकारी प्रदान करने का अनुरोध किया।

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एनसीपीसीआर के पत्र में मुख्य बिंदू

एनसीपीसीआर की ओर से आईटी मंत्रालय को लिखी गई चिट्ठी में कहा गया है, 'स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों पर उल्लू एप का बुरा असर पड़ रहा है। उल्लू एप पर स्कूली बच्चों को भ्रमित करने वाले अश्लील कंटेंट मौजूद होने की बात कही गई है।' चिट्ठी के अनुसार, उल्लू एप गूगल प्ले स्टोर और आईओएस की कोई केवाईसी पॉलिसी या उम्र वेरिफिकेशन नियम का पालन नहीं कर रहा है। साथ ही इस पर पॉक्सो कानून उल्लंघन का भी आरोप लगा है। 

बॉलीवुड हस्तियों से मिली शिकायत 

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को बॉलीवुड की जानी-मानी हस्तियों से भी एक शिकायत मिली है। इसमें आरोप लगाया गया है कि उल्लू एप जो आईओएस और प्ले स्टोर मोबाइल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है, इसमें बच्चों सहित अपने ग्राहकों के लिए गुप्त रूप से अश्लील कंटेंट उपलब्ध है। यह एप एप्पल और गूगल दोनों पर आसानी से उपलब्ध है। साथ ही आपत्तिजनक कंटेंट को डाउनलोड करने या देखने के लिए कोई केवाईसी की आवश्यक्ता नहीं है। 

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पॉक्सो अधिनियम का उल्लंघन

शिकायतकर्ता ने एक शो का स्क्रीनशॉट भी अटैच किया है, जिसमें स्कूली बच्चों के बीच अंतरंग संबंध को दिखाया गया है। उम्र वेरिफिकेशन प्रणाली के अभाव के कारण आपत्तिजनक कंटेंट हर उम्र के लोगों के लिए उपलब्ध है। इस कारण इसे यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, 2012 की धारा 11 का सीधा उल्लंघन माना गया है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने धारा के तहत शिकायत पर संज्ञान लिया है।

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10 दिन में रिपोर्ट की मांग

सीपीसीआर अधिनियम, 2005 की धारा 13(1)(i) स्थिति की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए उल्लू एप, गूगल प्ले स्टोर और आईओएस के खिलाफ उचित कार्रवाई करने का आदेश दिया है। पत्र में यह भी कहा गया है कि इसके जारी होने के 10 दिन के भीतर आयोग को मामले में एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करना चाहिए। 

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