सीन के बारे में बात करते हुए अभिनेता ने कहा, "यह असली आग थी। मैं जल रहा था। उस शूटिंग के बाद, मैं एक साल तक कुछ नहीं कर सका। मैं 60 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहा, जिस सीन में आप मुझे आग से बचने की कोशिश करते हुए देखते हैं, मैं जल रहा था। मेरी सारी त्वचा छिल गई थी।"
दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर ने भारतीय सिनेमा में कई फिल्में दी हैं। 'क्रांतिवीर' और 'परिंदा जैसी' उनकी फिल्में आज भी मशहूर हैं। इन फिल्मों की शूटिंग के दौरान हुई घटनाओं के बारे में बात करते हुए उन्होंने परिंदा के क्लाइमेक्स सीन का खुलासा किया, जिसमें वह एक शूटिंग के वक्त जल गए थे और कहा कि इस घटना ने उन्हें पूरे एक साल तक बेकार कर दिया। अपने अतीत का किस्सा साझा करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि क्रांतिवीर का क्लाइमैक्स सीन कभी लिखा ही नहीं गया था।
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नाना ने परिंदा के क्लाइमैक्स सीन का बताया सच
द लल्लनटॉप के साथ एक साक्षात्कार में, उन्होंने यह भी चौंकाने वाला खुलासा किया कि 'परिंदा' में उनकी भूमिका के लिए पहले जैकी श्रॉफ से संपर्क किया गया था, लेकिन बाद में उन्हें यह भूमिका मिली। उन्होंने कहा कि क्लाइमैक्स सीन में सच में आग लगी थी, और उस दौरान कोई डिजिटल एडिट नहीं हुआ था, और वह महीनों तक बिस्तर पर आराम कर रहे थे।
असली आग में जले थे नाना
सीन के बारे में बात करते हुए अभिनेता ने कहा, "यह असली आग थी। मैं जल रहा था। उस शूटिंग के बाद, मैं एक साल तक कुछ नहीं कर सका। मैं 60 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहा, जिस सीन में आप मुझे आग से बचने की कोशिश करते हुए देखते हैं, मैं जल रहा था। मेरी सारी त्वचा छिल गई थी... कुछ भी नहीं बचा था। दाढ़ी, मूंछ नहीं बची थीं। छह महीने तक, मैं पूरी तरह से बिस्तर पर था।"
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साल भर तक बिस्तर पर थे नाना
नाना ने आगे बताया कि यह एक जोखिम भरा हादसा था और उन्हें और पूरे सेट-अप को जलाने में मुश्किल से पांच सेकंड लगे। उन्होंने कहा "पहले टेक में, हमने तीन बाल्टियां डालीं, दूसरे में हमने 14 बाल्टियां डालीं, इसलिए आग बहुत तेज थी। हालांकि, यह एक दुर्घटना थी, ऐसा नहीं था कि विनोद चाहते थे कि मैं जल जाऊं। यह बस हो गया"।