मुंबई की एक सेशन कोर्ट ने सोमवार (20 मार्च) को जावेद अख्तर की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने एक समन के खिलाफ गुहार लगाई थी। बता दें कि आरएसएस के खिलाफ की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में एक वकील ने दिग्गज गीतकार-कवि जावेद अख्तर के खिलाफ याचिका दायर की थी, जिसमें मजिस्ट्रेट ने उनके खिलाफ समन जारी किया था।
यह है पूरा मामला
जानकारी के मुताबिक, वकील संतोष दुबे ने अक्तूबर 2021 के दौरान आईपीसी की धारा 499 और 500 के तहत जावेद अख्तर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। यह याचिका सबअर्बन मुलुंड में मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में दायर की गई थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मजिस्ट्रेट ने दिसंबर 2022 के दौरान जावेद अख्तर के खिलाफ समन जारी किया था। 78 वर्षीय दिग्गज गीतकार ने इस समन के खिलाफ सत्र अदालत में याचिका दायर की थी।
अदालत ने समन के खिलाफ याचिका की खारिज
वकील संतोष दुबे ने बताया कि सत्र अदालत ने मुलुंड कोर्ट के आदेश के खिलाफ जावेद अख्तर के पुनरीक्षण आवेदन को खारिज कर दिया है। अब जावेद अख्तर को 31 मार्च से पहले मुलुंड अदालत में पेश होना है।
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शिकायतकर्ता का यह है दावा
बता दें कि वकील संतोष दुबे खुद को आरएसएस समर्थक बताते हैं। उन्होंने जावेद अख्तर पर आरोप लगाया था कि राजनीतिक बढ़त हासिल करने के मकसद से जावेद अख्तर ने एक इंटरव्यू में जानबूझकर आरएसएस का नाम घसीटा था। इस तरह उन्होंने संगठन को बदनाम करने की कोशिश की। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इंटरव्यू के दौरान जावेद अख्तर ने जो बयान दिए, उनका मकसद हिंदूवादी संगठन को बदनाम करना था। साथ ही, उन लोगों को हतोत्साहित और गुमराह करना था, जो आरएसएस में शामिल हो गए हैं या संगठन में शामिल होना चाहते हैं।
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