दो साल बाद मराठी मुलगी राधिका आप्टे को सिनेमा में कदम धरे 20 साल हो जाएंगे। नेटफ्लिक्स की वह चहेती अभिनेत्री रही हैं, लेकिन ओटीटी हो या सिनेमा यहां सब सलाम चढ़ते सूरज को ही करते हैं। राधिका आप्टे की आखिरी फिल्म सिनेमाघरों में ‘विक्रम वेधा’ (हिंदी) रिलीज हुई थी, उसमें काम भी उनका कुछ खास नहीं था। याद रह जाने वाला काम करने का मौका उनको ओटीटी पर रिलीज हुई फिल्मों ‘रात अकेली है’ और ‘मोनिका ओ माय डार्लिंग’ में भी मिला। लेकिन, ‘विक्रम वेधा’ ने बॉक्स ऑफिस पर पानी तक नहीं मांगा। बाकी की दोनों ओटीटी फिल्मों में से एक फुस्स निकली तो दूसरी में लाइमलाइट बाकी सब लूट ले गए। राधिका आप्टे को एक दमदार फिल्म इन दिनों ऐसी चाहिए कि देखते ही दिल से वाह निकल उठे। माद्दा भी उनमें हैं अपने किरदारों से दर्शकों को चकित करने का लेकिन ऐसी कहानियां अब उनको मिल नहीं पा रही हैं। ‘मिसेज अंडरकवर’ देखते समय बार बार उनका ‘अहल्या’ का किरदार जेहन में घूमता रहता है, हो सकता है इसकी वजह कोलकाता की पृष्ठभूमि हो।
मिसेज अंडरकवर
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
कॉमिक थ्रिलर फिल्म की कोशिश
फिल्म ‘मिसेज अंडरकवर’ एक कॉमिक थ्रिलर फिल्म होने की कोशिश करती है। माने कि ऐसी फिल्म जिसमें रहस्य और रोमांच तो है लेकिन बीच बीच में दर्शकों को हंसाने और गुदगुदाने की कोशिशें भी हैं। हिंदी सिनेमा में निर्देशक बृज ने ‘विक्टोरिया नंबर 203’ और ‘चोर मेरा काम’ जैसी कमाल की कॉमिक थ्रिलर फिल्में बनाई हैं। मसला फिल्म ‘मिसेज अंडरकवर’ का भी कुछ कुछ वैसा ही है। प्राण जैसी मसखरी करने का मौका यहां राजेश शर्मा को मिला है। वह स्पेशल टास्क फोर्स के मुखिया हैं और अपनी एक भूली बिसरी अंडरकवर एजेंट को ऐसे मौके पर तलाशने निकले हैं जब कोई ‘कॉमन मैन’ शहर शहर युवतियों को सिर्फ इसलिए मार रहा है क्योंकि उसे महिला सशक्तिकरण की बात पसंद नहीं है। यानी अगर किसी लड़की ने उसके सामने समान अधिकारों की, पढ़ाई लिखाई की या फिर अपने बूते अपनी पहचान बनाने की बात कर दी, तो उसका मरना तय है। पुलिस कुछ करती नहीं दिखती तो एनआईए सरीखी ये स्पेशल टास्क फोर्स उसको पकड़ने निकली है। इस ‘कॉमन मैन’ ने फोर्स के सारे एजेंट्स भी मार दिए हैं। चीफ की तलाश जहां खत्म होती है, वहां पता चलता है कि 12 साल पहले टास्क फोर्स के एजेंट के रूप में प्रशिक्षित उनकी एक एजेंट कोलकाता में हंसी खुशी पारिवारिक जीवन बिता रही है।
मिसेज अंडरकवर
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
टेकऑफ में ही लड़खड़ाई कहानी
राधिका आप्टे फिल्म ‘मिसेज अंडरकवर’ में इसी एजेंट की भूमिका में हैं। घर पर बूढ़े सास, ससुर की वह सेवा करती है। पति को समय पर दफ्तर भेजने की सारी तैयारियां करती हैं। बेटे को होमवर्क वगैरह भी निपटाती है। अब टास्क फोर्स को उसे इस मायाजाल से निकालकर असली काम पर लगाना है। फिल्म ‘मिसेज अंडरकवर’ की कहानी, पटकथा और संवाद सब इसकी निर्देशक अनुश्री मेहता ने ही लिखे हैं। और, यही इस फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी है। कहानी को केंद्र बिंदु तक लाने के लिए वह इसे घटते हुए नहीं दिखातीं बल्कि इसके किरदार ये सब कहकर बताते हैं। टेकऑफ में गड़बड़ाई ये फिल्म अपनी उड़ान पाने के बाद संभलने की कोशिश करती है लेकिन फिल्म में रहस्य नाम की कोई चीज़ शुरू से नहीं है। कातिल कौन है? का मामला अनुश्री शुरू में ही खोल देती हैं। अब बस पूरी फिल्म इस बात पर है कि इसे अंडरकवर एजेंट दुर्गा दबोचेगी कैसे?
मिसेज अंडरकवर
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
सीक्वल के ख्वाब दिखाती फिल्म
क्लाइमेक्स में सीक्वल की सुर्री छोड़कर निर्देशक अनुश्री मेहता ये भी जाहिर करती हैं कि उन्हें अपनी फिल्म के हिट होने का पक्का भरोसा है लेकिन हकीकत यही है कि फिल्म सिनेमाघरों तक भी नहीं पहुंच पाई और इसका उद्धार उस ओटीटी जी5 ने किया है, जिस पर कोई ढंग की फिल्म रिलीज हुए जमाना हो चुका है। फिल्म ‘मिसेज अंडरकवर’ का विचार अच्छा है और इस पर किसी काबिल पटकथा लेखक ने अपना दिमाग लगाया होता तो ये फिल्म भी अच्छी बन सकती थी लेकिन यहां मामला इसलिए भी नहीं जम पाया है कि एक विदूषक सरीखे टास्क फोर्स चीफ और उसकी अंडरकवर एजेंट के बीच का सामंजस्य किसी नौटंकी जैसा भी नहीं है। दोनों के मेल मिलाप से कहने को कॉमेडी तो बनती है लेकिन उसमें हंसी नहीं आती। रही बात थ्रिल की तो फिल्म का क्लाइमेक्स इतना लंबा खिंच गया है कि उसका मजा भी जाता रहता है।
मिसेज अंडरकवर
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
राधिका और सुमित ने नहीं लगाया जोर
फिल्म ‘मिसेज अंडरकवर’ अभिनेत्री राधिका आप्टे की लीड रोल वाली ऐसी फिल्म है जिसमें बतौर अभिनेत्री उनका कोई विकास होता नहीं दिखता। अपने सपने में जेम्स बॉन्ड सरीखे अपने ही एक्शन सीन देखने वाली अंडरकवर एजेंट दुर्गा के रोल में राधिका आप्टे कमाल कर सकती थीं, अगर फिल्म की पटकथा, निर्देशन और इसके कुछ साथी कलाकार ढंग के होते और इस किरदार में कुछ खास वह अपनी तरफ से दिखा पातीं। राजेश शर्मा की ही तरह सुमित व्यास भी फिल्म को बचाने की थोड़ी बहुत कोशिश ही करते दिखते हैं। लेकिन, विलेन के तौर पर उनका अभिनय औसत से कमजोर है। एक शांतचित्त कातिल का पूरा किरदार वहां आकर बिखर जाता है जहां वह अपने घर में ही कांड कर देता है।
मिसेज अंडरकवर
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
सहायक कलाकारों ने लगाया दम
अभिनय के मामले में राधिका, सुमित और राजेश से बेहतर काम फिल्म ‘मिसेज अंडरकवर’ के सहायक कलाकारों साहब चटर्जी और रोशनी भट्टाचार्य ने कर दिखाया है, तीनों कम से कम अपने किरदार में तो हैं। राधिका, सुमित और राजेश को देखकर तो यूं लगता है कि जैसे तीनों ने बस एक और फिल्म निपटा दी है। तकनीकी टीम ने भी फिल्म ‘मिसेज अंडरकवर’ में ऐसा कोई खास हुनर नहीं दिखाया है जिसकी तारीफ करने के लिए अलग से कुछ कहना, सुनना जरूरी हो।