मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे
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यह है असली कहानी
यह फिल्म भारतीय कपल सागरिका भट्टाचार्य और अनुरूप भट्टाचार्य की जिंदगी से जुड़ी एक घटना के इर्द गिर्द बुनी गई है। इस कहानी की शुरुआत साल 2011 में होती है, जब यह कपल काम के सिलसिले में अपने बच्चो के साथ नार्वे में शिफ्ट हुआ। उस समय दोनों के दो बच्चे थे। उनकी बेटी ऐश्वर्या की उम्र एक साल और बेटे अभिज्ञान की उम्र तीन साल थी। वहां रहने के दौरान कपल पर नार्वे की चाइल्ड वेलफेयर सर्विसेज (सीडब्ल्यूएस) ने उनके दोनों बच्चों को फॉस्टर केयर में देने का दबाव बनाया था। सीडब्ल्यूएस के अधिकारियों ने आरोप लगाया था कि सागरिका ने एक बच्चे को थप्पड़ मारा था। साथ ही उन पर बच्चों को जबर्दस्ती खिलाने, ढ़ग के कपड़े न पहनाने और खेलने के लिए खिलौने उपलब्ध न करने के भी आरोप लगे थे।
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कपल ने आखिरकार जीती जंग
इन आरोपों के बाद सीडब्ल्यूएस ने उन्हें फॉस्टर केयर में भेजने का फैसला किया था। साथ ही, यह भी तय किया गया था कि बच्चों के माता-पिता उनसे 18 साल की उम्र तक नहीं मिल सकेंगे। इस फैसले के बाद कपल और सीडब्ल्यूएस के बीच बच्चों की कस्टडी को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू हुई। शुरुआत में भारत सरकार की तरफ से भी इस मामले में दखल दिया गया, लेकिन बाद में कपल को यह जंग अकेले ही लड़नी पड़ी। नवंबर 2012 में सागरिका को बड़ी कामयाबी मिली। वह साइकेट्रिक टेस्ट में पास हो गईं, जिसके बाद उन्हें बच्चों को साथ रखने की इजाजत मिल गई।
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