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गायक-अभिनेता किशोर कुमार के वो रोचक किस्से, जो उन्हें 'लेजेंड' बनाते हैं

Fri, 13 Oct 2017 01:13 PM IST
बीबीसी हिंदी. कॉम
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आभास कुमार गांगुली या यूं कहिए वो 'लेजेंड' जिन्हें हम जानते हैं किशोर कुमार के नाम से। लता मंगेशकर मानती हैं कि किशोर उन्हें गायकों में सबसे ज्यादा अच्छे लगते थे। उन्होंने कहा कि किशोर हर तरह के गीत गा लेते थे और उन्हें ये मालूम था कि कौन सा गाना किस अंदाज में गाना है।
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लता ही नहीं, उनकी बहन आशा भोसले के भी सबसे पसंदीदा गायक थे और उनका मानना है कि किशोर अपने गाने दिल और दिमाग दोनों से ही गाते थे। आज भी उनकी सुनहरी आवाज लाखों संगीत के दीवानों के दिल में बसी हुई है और उसका जादू हमारे दिलों दिमाग पर छाया हुआ है।

किशोर कुमार के बड़े बेटे अमित कुमार ने बीबीसी को बताया कि वो बहुत ही अच्छे पिता और व्यक्ति थे और उन्हें अपने परिवार के साथ समय बिताना बहुत ही पसंद था। वे कहते हैं, "किशोर जी को अंग्रेजी 'क्लासिक' फिल्में देखने का शौक था। एक बार तो अमरीका से वो ढेर सारी 'वेस्टर्न' फिल्मों की कैसेट ले आए।"
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यही नहीं वीकेंड पर अक्सर अमित कुमार उनके साथ एक के बाद एक तीन फिल्म शो देखकर थक कर घर लौटते थे।

मनमौजी किशोर

अमित ने बताया कि किशोर जी खुद मानते थे कि वो बहुत ही मनमौजी थे। वो क्या करेंगे ये कोई नहीं जानता था। अमित बताते हैं, "एक बार जब उनकी फिल्म की शूटिंग खत्म हुई और यूनिट के लोग उनसे पैसे मांगने आए तो किशोर बोले ये इतना ज्यादा कैसे हो गया, इतना तो नहीं होना चाहिए, ये समझता क्या है अपने आप को डायरेक्टर, ऐसा तो नहीं होगा, मैं प्रोड्यूसर हूं चलो भगाओ इस डायरेक्टर को इतना ज्यादा खर्चा कर रहा है, कौन है डायरेक्टर?'   इस पर सबने कहा -आप ही तो हैं।"
इस पर किशोर बोले, "हां अरे वो तो मैं ही हूं।"
हंसते हुए अमित ने कहा कि ऐसे कई मजेदार किस्से होते थे उनके साथ।

किशोर दा को बाजार जाकर छोटी- छोटी चीजें, तरह तरह के आइटम खरीदने का शौक था और एक बार वो ऐसे ही बाजार गए जहां अचानक मसूर की दाल देखकर उन्होंने तुरंत 'मसूरी' घूमने का प्लैन बना लिया। बस कुछ ऐसी ही मनमौजी प्रवृत्ति थी किशोर कुमार की, यही बताया उनके बेटे अमित कुमार ने।

बड़े ही मजेदार आदमी थे किशोर

रेडियो की जानी मानी हस्ती अमीन सायानी ने बीबीसी को बताया कि बड़े ही मजेदार आदमी थे किशोर, उनका दिल बहुत अच्छा था पर बेहद शरारती भी थे।
एक दफा तो उन्होंने इंटरव्यू भी अमीन साहब को इसी शर्त पर दिया कि वो अपने आप को खुद ही इंटरव्यू करेंगे। इसके बाद अमीन सायानी को दिए एक और इंटरव्यू में किशोर कुमार ने खूबसूरत अंदाज में सचिन देव बर्मन के साथ पहली मुलाकात की नकल करके दिखाई।

किशोर कुमार ने कई गायकों के साथ जुगलबंदी की और सभी के चहेते थे वो। सिंगर मन्ना डे कहते हैं कि किशोर दा ने संगीत की शिक्षा नहीं ली थी। उनकी गायकी उन्हें ईश्वर की देन थी।

मन्ना डे ने कहा कि हालांकि, मन्ना डे खुद संगीत में पारंगत थे पर फिर भी जब वो किशोर के साथ गाते तो वो कमर कस के गाते थे। उन्होंने कहा कि किशोर की तुलना किसी से भी नहीं की जा सकती।

मन्ना डे ने बताया कि फिल्म पड़ोसन के हिट गीत 'चतुर नार' की रिकॉर्डिंग में तो पूरे 12 घंटे लग गए जिसमें से तीन घंटे तो किशोर दा की बातों पर हंस हंस कर सब का पेट दर्द हो गया।

हरफनमौला

संगीत निर्देशक राजेश रौशन ने किशोर दा को याद करते हुए कहा कि वो इतना डूब कर गाते थे कि गाने का क्या रूप और रंग होना चाहिए, ये वो संगीत निर्देशक से भी बेहतर समझते थे और आज तक उनका सबसे पसंदीदा गीत है हिट फिल्म 'जूली' का गाया हुआ गाना 'दिल क्या करे...'

बतौर एक्टर किशोर कुमार ने 'चलती का नाम गाड़ी', 'हॉफ टिकेट', 'पड़ोसन' और 'झुमरु' जैसी कई फिल्मों में काम किया। फिल्म निर्माता और निर्देशक यश चोपड़ा कहते हैं कि किशोर न सिर्फ गायक थे, बल्कि एक एक्टर, प्रोड्यूसर, निर्देशक, निर्माता, लेखक, म्यूजिक कम्पोजरसभी कुछ थे।

उन्होंने बताया कि जिस तरह से किशोर अपने गानों में फिल्म के सीन के पूर भाव डाल देते थे वो बेमिसाल था। यश चोपड़ा भी किशोर कुमार की शरारतों के बारे में बात किए बिना नहीं रह पाए और उन्होंने माना कि किशोर लोगों को रिकॉर्डिंग के समय बहुत ही हंसाते थे।

किशोर कुमार के साथ कई स्टेज शो में हिस्सा ले चुके उनके मित्र गायक भूपेन्द्र सिंह के मुताबिक उनकी आवाज सबसे अलग थी और किसी गाने में किस जगह क्या डालना है ये वो बखूबी जानते थे

सत्तर का दशक हो या फिर आज का समय किशोर कुमार के गाने हर युग के लोगों के होठों पर रहते हैं और किशोर के साथ बहुत सी फिल्मों में काम कर चुके संगीत निर्देशक बप्पी लाहिरी के मुताबिक किशोर के गानों में कॉमेडी, रोमांस और बहुत से भाव होते थे।

उनके अनुसार, किशोर कुमार रिकॉर्डिंग के समय ही बोल देते थे कि गाना हिट होगा या नहीं। वो मानते हैं कि किशोर कुमार जैसा न कभी कोई हुआ है और न कभी कोई होगा।

रुमा घोष, मधुबाला और योगिता बाली के बाद शायद अपने सपनों की रानी किशोर दा को मिली अपनी चौथी पत्नी लीना चंद्रवरकर के रूप में।
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जब चौकीदार ही उन्हें देख डर गया..

लीना ने बताया," एकदम बच्चों जैसे थे किशोर। छोटी छोटी बातों से इतना खुश हो जाते थे। कभी कभी बारिश को देख इतना खुश हो जाते मानो पहली बार देख रहे हों। उन्हें लोगों को चौंकाने में बहुत ही आनंद आता था। वो विदेश से कई तरह के मुखौटे लाए थे और एक बार तो उनका चौकीदार ही उनको देखकर डर गया। ऐसी शरारतें करने मे वो माहिर थे।"

लीना ने ये भी बताया कि किशोर कहते थे कि जब वो इस दुनिया में नहीं रहेंगे तब भी उन्हें कोई नहीं भूलेगा और उन्हें हमेशा याद रखेंगे उनके चाहने वाले।
सच ही तो कहा था किशोर दा ने। उन्होंने हम सभी के दिल में अपनी ऐसी तस्वीर बना ली है जिसे समय की लहरें मिटा ही नहीं सकती और उनके अमर गीत तो हमेशा हमेशा ही याद रखे जाएँगे।
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