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माफ कीजिएगा, मुझे ऐसा ही हिंदुस्तान दिखता है: रूश्दी

Tue, 22 Jan 2013 03:53 PM IST
नई दिल्ली/आईएएनएस
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मशहूर लेखक सलमान रूश्दी कहते हैं कि किसी भी विषय का फिल्मांकन असंभव नहीं है। भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति, बंटवारे और अपातकाल के दौर को लेकर लिखी गयी रूश्दी की किताब 'मिडनाइट्स चिल्ड्रेन' पर फिल्म निर्देशिका दीपा मेहता ने फिल्म बनाई है। फिल्म की पटकथा स्वयं रूश्दी ने लिखी है। फिल्म के सूत्रधार की भूमिका निभाई भी उन्होंने ही निभाई है। वह कहते हैं कि फिल्म के माध्यम से उन्हें कई नई बातें जानने को मिलीं।
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फिल्म के निर्माण के दौरान दीपा और उनकी मित्रता और गहरी हुई है। फिल्म 'मिडनाइट्स चिल्ड्रेन' सलीम सिनाई नामक व्यक्ति के इर्द गिर्द घूमती है जिसका जन्म आधी रात को 15 अगस्त 1947 के दिन हुआ था। फिल्म में सत्या भाभा, शबाना आजमी, सीमा बिस्वास, कुलभूषण खरबंदा और दर्शिल सफारी ने मुख्य भूमिका निभाई है। सलमान रूश्दी ने अपनी फिल्म और उस हिंदुस्तान के बारे में बात की जिसका इस फिल्म में जिक्र है। पेश है उनसे फिल्म को लेकर हुई बातचीत के मुख्य अंश,

'मिडनाइट्स चिल्ड्रेन' के माध्यम से क्या कहना चाहते हैं?
'मिडनाइट चिल्ड्रेन' हिंदुस्तान को देखने का एक नजरिया है। अगर किसी को बुरा लगे तो मुझे माफ कीजिएगा पर मुझे ऐसा ही हिंदुस्तान दिखता है। मुझे खुशी है कि बहुत से लोगों ने इस उपन्यास को पसंद किया है। अब इस विषय पर फिल्म बन रही है। देखते हैँ कि फिल्म को लेकर कैसी प्रतिक्रिया होती है। अनिता देसाई, किरण देसाई, सुकेतु मेहता सहित बहुत से भारतीय लेखक/लेखिकाओं ने फिल्म के बारे में अच्छी प्रतिक्रियाएं दी हैं।
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आपके नजरिए से कौन से कलाकार फिल्म में अपने किरदारों में प्रभावी रहे हैं?
हम भाग्यशाली हैं कि इतने बेहतरीन कलाकारों ने फिल्म में काम किया है। सभी ने फिल्म में बेहतरीन अभिनय किया है। किसी एक का नाम लेना मुश्किल होगा लेकिन यदि कहना ही पड़े तो सीमा बिस्वास 'मैरी' परेरा के किरदार में अदभुत रही हैं।

फिल्म निर्माण से आपका जुड़ाव कहां तक रहा है, क्या आपको कभी ऐसा महसूस हुआ कि आपको अपनी फिल्म का निर्देशन करना चाहिए?
मैंने फिल्म की पटकथा लिखी है और फिल्म का सूत्रधार हूं। फिल्म के संपादन कार्य के दौरान भी मैं लगातार जुड़ा रहा। मैं फिल्म निर्माण में योगदान देना चाहता था और मैंने यह किया। हम सबने ही अपना अपना काम किया। रहा सवाल फिल्म के निर्देशन का तो उसके बारे में मुझे जानकारी नहीं है। वह मैंने दीपा पर छोड़ दिया था।

किताब को फिल्म की शक्ल देना कितना मुश्किल लगा?
कुछ भी फिल्माना असंभव नहीं है। किताबों पर बहुत सारी फिल्में बनाई जा चुकी हैं। 'अन्ना करनिना', 'उलीसेस' और 'द टिन ड्रम' किताबों पर आधारित फिल्में हैं। आपको सिर्फ सही तरीका ढूंढने की जरूरत होती है। कोई जादू नहीं होता सिर्फ कड़ी मेहनत से काम पूरा किया जा सकता है।

क्या आप हिंदी फिल्में देखते हैं? आपका मनपसंद अभिनेता/अभिनेत्री कौन है?
माफ करें, मैं हिंदी सिनेमा के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं रखता हूं। कुछ साल पहले आमिर खान ने मुझे फिल्म 'तारे जमीं पर' दिखाई थी। मुझे यह बहुत पसंद आई। मैंने तब पहली बार दर्शिल सफारी का अभिनय देखा था। दर्शिल ने मेरी फिल्म 'मिडनाइट्स चिल्ड्रेन' में छोटे सलीम की भूमिका निभाई है। यदि हिंदी में अच्छा सिनेमा बनेगा तो उसे जरूर एप्रीसिएट करूंगा।
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