कार्तिक आर्यन कहते हैं, 'मैं बोलकर किसी को भी जवाब नहीं देता हूं। मैं अपने काम के जरिए जवाब देना पसंद करता हूं। मैं चुप रहकर सब सुनता हूं। मैं अपनी जिंदगी के सबसे कठिन दौर में भी खामोश रहा'।
बॉलीवुड के चहेते स्टार कार्तिक आर्यन इन दिनों सुर्खियों में बने हुए हैं। उनकी फिल्म 'चंदू चैंपियन' को दर्शकों का प्यार मिल रहा है। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बढ़िया प्रदर्शन कर रही है। फिल्म में कार्तिक आर्यन की एक्टिंग की हर कोई सराहना कर रहा है। वहीं पिछले दिनों एक इंटरव्यू के दौरान अभिनेता ने अपनी इस फिल्म के अलावा अपने निजी जीवन के बारे में बातें करते नजर आए। साथ ही साथ उन्होंने इस बात का भी खुलासा किया कि वे अपने जीवन से नकारात्मकता को कैसे दूर रखते हैं।
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नकारात्मकता से नहीं होने देते खुद को प्रभावित
हाल ही में कार्तिक आर्यन के विषय कई नकारात्मक बातें सुनने को मिली। जब अभिनेता से इस पूछा गया कि वे अपने लिए जब ऐसी बातें सुनते हैं तब उन्हें कैसा लगता है। इस सवाल के जवाब में कार्तिक आर्यन कहते हैं, 'मैंने नकारात्मकता से अलग होने की कला सीख ली है। मैं अब उन बातों पर बिल्कुल ध्यान नहीं देता हूं। मैं सिर्फ अपने काम से मतलब रखता हूं। मेरे लिए मेरा काम ही बोलता है'।
खामोशी ताकतवर होती है
कार्तिक आर्यन आगे कहते हैं, 'मैं बोलकर किसी को भी जवाब नहीं देता हूं। मैं अपने काम के जरिए जवाब देना पसंद करता हूं। मैं चुप रहकर सब सुनता हूं। मैं अपनी जिंदगी के सबसे कठिन दौर में भी खामोश रहा। इसमें बहुत ताकत होती है। चाहे अच्छी चीजें हों या बुरी मैं चुप रहने की कोशिश करता हूं। मैंने बड़ी से बड़ी परिस्थिति को खामोशी से निपटाया है'।
कोई आज के दौर में मुर्ख नहीं है
सोशल मीडिया पर अपने बारे में लिखी जा रही बातों पर 'चंदू चैंपियन' स्टार कहते हैं, 'आज के दौर में कोई मुर्ख नहीं है। कौन किसके बारे में क्या लिख रहा है या क्या बोल रहा है यह सब समझते हैं। मेरा मानना है कि आपको बस चुप रहना चाहिए और अपने काम को शब्दों से ज्यादा जोर से बोलने देना चाहिए'। कार्तिक आर्यन ने साल 2011 में लव रंजन की फिल्म 'प्यार का पंचनामा' से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। उस फिल्म के बाद वे 'प्यार का पंचनामा 2', 'सोनू के टीटू की स्वीटी' और 'लुका छुपी' जैसी फिल्मों में नजर आए। दर्शकों ने उनकी फिल्मों को हमेशा सराहा है।