1. जिया की आत्महत्या पर
सीबीआई की विशेष अदालत के जज एएस सैयद ने फैसला सुनाते हुए कहा, ''इसमें कोई संदेह नहीं है कि एक युवा लड़की का आत्महत्या करना दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। रिकॉर्ड पर लाए गए साक्ष्य बताते हैं कि यह लड़की अपनी ही संवेदनाओं की शिकार हुई। वह अपनी भावनाओं से उबर नहीं पाई। वह हमेशा अपने रिश्ते से बाहर निकल सकती थी। हालांकि, वह अपनी संवेदनाओं और आरोपी के प्रति अपने प्यार से उबर नहीं पाई ...और इसके लिए आरोपी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।''
2. सूरज पंचोली पर
कोर्ट ने कहा कि आरोपी ने जिया की डिप्रेशन से बाहर आने में मदद की थी। उस वक्त आरोपी अभिनय के क्षेत्र में अपना करियर तलाश रहा था और वह जिया को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहा था। बहरहाल, पहले जब एक बार जिया ने आत्महत्या करने की कोशिश की तो उसने उसे बचाया भी था। जो साक्ष्य रिकॉर्ड पर हैं, वे अस्पष्ट हैं। ऐसा कोई सबूत नहीं है जो यह बताए कि तीन जून 2013 को सूरज पंचोली यह चाहते थे कि जिया खान सुसाइड कर लें। लिहाजा, किसी भी तरह से यह नहीं कहा जा सकता था कि आरोपी ने उस दिन उसे आत्महत्या के लिए विवश किया। अभियोजन भरोसा करने लायक ऐसे साक्ष्य देने में नाकाम रहा जो यह साबित कर सकें कि आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) का मामला बनता है।
3. जिया की मां के बारे में
विशेष अदालत ने जिया खान की मां के बारे में भी फैसले में टिप्पणी की। अदालत ने कहा, ''शिकायतकर्ता ने खुले तौर पर अभियोजन पर अविश्वास जताया। जब अभियोजन ने कहा कि मामला आत्महत्या का है तो शिकायतकर्ता ने कहा कि यह हत्या है। शिकायतकर्ता ने अभियोजन के मामले को ठुकराया और पहले दिए गए अपने बयानों से पलट गईं।''
4. विरोधाभासी साक्ष्य
कोर्ट ने कहा, ''शिकायतकर्ता ने खुलकर विरोधाभासी साक्ष्य दिए। उन्होंने खुद ही अपने मामले को खत्म कर दिया। जब विशेषज्ञ गवाहों ने मौत की वजह को आत्महत्या बताया, तब शिकायतकर्ता ने एकदम विरोधी नजरिया अपनाकर कहा कि डॉक्टरों ने गलत राय दी है। पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर पर भी शिकायतकर्ता ने शक जताया। शिकायतकर्ता ने खुद को छोड़कर बाकी सभी पर शक जताया।''
5. नोटबुक में मिली चिट्ठी
कोर्ट ने इस बात पर भी टिप्पणी की कि कैसे राबिया को जिया की मौत के चार दिन बाद अचानक एक नोटबुक में एक चिट्ठी मिली। पूछताछ के लिए वह चिट्ठी मांगी गई, लेकिन राबिया ने उसे देने से इनकार कर दिया और उसे मीडिया में प्रकाशित करा दिया। शिकायतकर्ता के मुताबिक, बाद में जांच अधिकारी को वह पत्र नोटरी कराने के बाद सौंपा गया था, लेकिन वह नोटरी नहीं हुआ था। ये हालात इस बात की ओर गंभीर संदेह पैदा करते हैं कि उस चिट्ठी का मूल लेखक कौन था?''
8. जिया की प्रेग्नेंसी पर
10. जिया और सूरज के बीच मतभेद पर
कोर्ट के मुताबिक, राबिया को यह पता था कि पंचोली और उनकी बेटी के बीच मतभेद हैं, लेकिन इस बारे में किसी के भी सामने शिकायत नहीं की गई थी। इसी तरह जिया ने भी कभी किसी के सामने पंचोली का नाम नहीं लिया। जिया की बहन को जो चिट्ठियां मिलीं, वह किसी व्यक्ति की ओर इशारा नहीं करतीं। यह बात साफ है कि ये चिट्ठियां कभी आरोपी तक नहीं पहुंचीं और घर में ही मौजूद रहीं।