ब्रेन में खून का क्लॉट जमने से ऋतिक रोशन पिछले कुछ समय से तेज सिरदर्द की समस्या से पीड़ित थे। रविवार को मुंबई के हिंदुजा अस्पताल में उनकी सर्जरी हुई है। अब ऋतिक खतरे से बाहर हैं लेकिन उन्हें चार से पांच सप्ताह बिस्तर पर ही आराम करना होगा।
ऋतिक रोशन की ब्रेन सर्जरी अचानक ही नहीं हुई है। पिछले दो महीने से ऋतिक इसके लिए सही समय का इंतजार कर रहे थे। वह चाहते थे कि वह अपनी फिल्म 'बैंग बैंग' की शूटिंग कर पूरी कर लें।
ऋतिक रोशन को पहली बार यह समस्या करीब दो महीने पहले महसूस हुई थी। वह अपने व्यस्त शेड्यूल में अपनी आने वाली फिल्म 'बैंग बैंग' की शूटिंग कर रहे थे। एक दिन उन्होंने अचानक ही सर के पिछले हिस्से में तेज दर्द की शिकायत की।
यह दर्द कुछ समय के बाद ठीक हो गया। ऋतिक ने मुंबई आकर ब्रेन सर्जरी करायी। तभी उन्हें मस्तिष्क में खून का क्लॉट दिखा। इसके बाद से समस्याएं बढ़ती गयीं। शूटिंग के दौरान कई बार तेज दर्द उभरता। इस दौरान ऋतिक पेन किलर खाकर शूटिंग पूरी करते।
समस्या तब अधिक हुई जब उनकी इस बीमारी का असर उनके चलने और पढ़ने में होने लगा। रितिक का इलाज करने वाले डा. बसंत कुमार मिश्रा कहते हैं कि हालात इतने बिगड़ गए कि उन्हें लिखने में भी दिक्कत होने लगी। इसके साथ-साथ उनमें उल्टी होने की एक टेंडेंसी घर कर गयी थी।
इसके बाद भी रितिक इस सर्जरी का इलाज टालते रहे। लेकिन आपरेशन से दो दिन पहले विदेश जाने वाले रितिक रोशन को इस बार डॉक्टरों और परिवार ने जबरन रोक लिया।
सर्जरी अच्छे तरीके से पूरी हो गयी है। रितिक के पिता व निर्देशक राकेश रोशन का कहना है कि चिंता की कोई बात नहीं है।
सर्जरी के पहले भावुक हुए रितिक
सर्जरी के पहले रितिक ने अपने चाहने वालों को अपनी इस सर्जरी के बारे में बताया था। उन्होंनें अपनी पोस्ट में लिखा था, ‘मैं आज ब्रेन सर्जरी के लिए जा रहा हूं और मैं आप सभी को बता देना चाहता हूं कि बहुत ही जल्दी ठीक हो जाऊंगा। मैं आप सभी लोगों का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं, जिन्होंने मेरी जिंदगी में योगदान देने के लिए अपने दिमाग की शक्ति का इस्तेमाल किया।
उन्होंने आगे लिखा, ‘हम सभी जानते हैं कि हम अपने दिमाग का इस्तेमाल कर जिंदगी को बेहतर बनाते हैं। मुझे इस बात की खुशी है कि मैंने अपने दिमाग का इस्तेमाल कर बहुत सारे अच्छे काम किए। हर किसी को इस ओर देखना चाहिए और इसकी कीमत समझनी चाहिए।
यह हमें देखने, सुनने, छूने, सूंघने और स्वाद लेने की शक्ति देता है। इसी के दम पर हम डर पर काबू पाते हैं और अकल्पनीय कामों को करने का साहस पैदा कर पाते हैं। हो सकता है कि अब मेरे लिए यह वही समय है, जब मैं इस शक्ति को महसूस करूं।’