मामले में जस्टिस एसएम मोदक और जस्टिस जे रेवती मोहिते डेरे ने कहा कि यह सिर्फ एक दुर्घटना थी। बच्चे ने जानबूझकर टक्कर नहीं मारी है। नौ साल के बच्चे के खिलाफ प्राथमिकी नहीं हो सकती। इससे बच्चे को आहत पहुंचा है। साथ ही मामले में प्राथमिकी दर्ज करने वाले सहायक पुलिस आयुक्त संजय पाटिल के खिलाफ कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।
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मामले में बच्चे और उसकी मां को राज्य सरकार से 25 हजार रुपये देने और इसमें शामिल पुलिस अधिकारियों से यह राशि वसूल करने का भी आदेश दिया है। दरअसल, 27 मार्च को गोरेगांव में लोढ़ा फियोरेंजा में 62 वर्षीय मां शाम को सैर करने निकली थीं। इसी दौरान बच्चे की साइकिल से टकराने से वह घायल हो गईं। इसके बाद पुलिस हरकत में आईं और डोंगरी में किशोर न्याय बोर्ड में रिपोर्ट पेश की।
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वहीं, कोर्ट के फैसले पर मीडिया से बात करते हुए बच्चे की मां ने कहा कि वह बहुत खुश हैं और यह उनके लिए सबसे अच्छा दिवाली तोहफा है कि उनके बच्चे के खिलाफ दर्ज शिकायत हाईकोर्ट ने रद्द कर दी है। बच्चे की मां ने कहा कि पुलिस ने अपनी शक्ति का गलत इस्तेमाल किया है और उन्होंने कई कानूनों का उल्लंघन किया है, ऐसे में सभी लोगों को सजा मिलनी चाहिए।
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