इस नए गठजोड़ को लेकर जारी सूचना के साथ ही ये सूचना भी बाहर आई कि ईरॉस नाउ के भुगतान करने वाले ग्राहक इसके कुल पंजीकृत ग्राहकों का 20 फीसदी भी नहीं बचे हैं। आम तौर पर किसी ओटीटीट में पंजीकृत ग्राहकों और भुगतान करने वाले ग्राहकों का प्रतिशत 60 से ऊपर होना ही स्वस्थ औसत माना जाता है। सिर्फ 20 फीसदी भुगतान करने वाले ग्राहकों के साथ ईरॉस नाउ का भविष्य में तरक्की कर पाना काफी मुश्किल नजर आ रहा है। कंपनी ने बताया कि उसके कुल पंजीकृत ग्राहकों की संख्या 21.15 करोड़ है जबकि इसमें से भुगतान करके मनोरंजन सामग्री देखने वालों की संख्या सिर्फ 3.62 करोड़ ही बची है।
ईरॉस नाउ ने हाल ही में भारतीय दर्शकों को भारत और दुनिया के दूसरे देशों में अपने प्लेटफॉर्म पर लाने के लिए कुछ बड़े एलान भी किए थे, लेकिन उनका भी खास असर इसके एप डाउनलोड या ग्राहक आधार में वृद्धि में नहीं मिला है। इसकी खास वजह ओटीटी बाजार पर नजर रखने वाले इसकी मार्केटिंग और पीआर रणनीति का कमजोर होना बताते हैं। किसी भी ओटीटी की ब्रांडिंग में इसकी मार्केटिंग टीम का बिजनेस टू बिजनेस कनेक्शन मजबूत होने के साथ साथ बिजनेस टू कंज्यूमर भी सुगम होना महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन देश की सबसे बड़ी फिल्म लाइब्रेरी होने के बावजूद ईरॉस के पास सिर्फ साढ़े तीन करोड़ ही भुगतान करने वाले ग्राहक होने पर इंडस्ट्री के जानकार सवाल उठा रहे हैं।
हालांकि, ईरॉस नाउ के सीईओ अली हुसैन अब भी अपनी कंपनी की रणनीति को लेकर आशान्वित हैं। उनका कहना है कि भारतीय मनोरंजन सामग्री के तेजी से बढ़ते वैश्विक बाजार के चलते ईरॉस नाउ तमाम भौगोलिक क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत करने की स्थिति में पहुंच रहा है। मध्य पूर्व के देश इसके लिए खास क्षेत्र हैं। अली ने उम्मीद जताई कि नए गठबंधनों से ईरॉस नाउ को अपना दर्शक आधार बढ़ाने में भारी मदद मिलेगी।