15 अगस्त को रिलीज हुई फिल्म वंस अपॉन ए टाइम इन मुंबई दोबारा अपने विषय के साथ डॉयलॉग के लिए भी चर्चा पा रही है। रजत अरोड़ा के लिखे डायलॉग फिल्म की जान बन रहे हैं। आप भी देखिए इनमें से कौन सा डायलॉग आपको सबसे ज्यादा लुभा रहा है।
*पहले खिलाड़ी था, अब पूरा खेल हूं।
*हीरो क्या होता है... प्यार के लिए लड़ने वाला दोस्ती के लिए मरने वाला, किस्मत से फकीर पर हिम्मत से भरा हुआ शरीफ आदमी... और विलेन वो जो शराफत की उम्मीद खुद से भी नहीं करता।
*मुझे अच्छा बनने का शौक नहीं। सुना है ऊपर वाला अच्छे लोगों को जल्दी अपने पास बुला लेता है।
*हीरो मरने के बाद स्वर्ग जाता है और विलेन जीते जी स्वर्ग पाता है।
*तू अपना बच्चा है असलम... तेरे मातम पे एक पैग एक्स्ट्रा लगाऊंगा, पर तुझे मारूंगा जरूर।
*हर आते जाते रास्ते पर लिख दो यहां कानून का आना जाना मना है।
*अगर मैं हीरो बन गया तो मेरी पहचान न बुरा मान जाएगी।
*पीने की कैपेसिटी, जीने की स्ट्रेंथ, एकाउंट का बैलेंस और नाम का खौफ... कभी कम नहीं होना चाहिए।
*मोहब्बत वो मोहरा है जिसकी वजह से बड़े बड़ों को मौत मिली है।