दीपक सावंत फिल्मों के सबसे चर्चित मेकअप आर्टिस्ट हैं। 45 साल से सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के साथ हैं। इस बीच दीपक ने भोजपुरी एवं हिंदी में चार फिल्में भी बनाईं। उनकी हर फिल्म में अमिताभ हैं। आठ दिसंबर को आ रही 'द ग्रेट लीडर' में भी बिग बी दिखेंगे। इंडस्ट्री और अमिताभ के साथ लंबे सफर पर दीपक से अमर उजाला की विशेष बातचीत...
-अमितजी आपकी बनाई हर फिल्म में होते हैं। वह कहने मात्र से आ जाते हैं या स्क्रिप्ट दिखानी पड़ती है?
वह एकदम हां नहीं कहते। मुझे उनकी आदत मालूम है। पहली फिल्म 'गंगा' में उन्होंने मना कर दिया था। मैंने स्क्रिप्ट दी और कहा कि सर पढ़ लीजिए। अच्छी न लगे, तो मेरे सामने कचरे के डिब्बे में डाल दीजिएगा ताकि जिंदगी में कभी फिल्म न बनाऊं। तब उन्होंने कहा कि रखो-रखो। आठ-दस दिन बाद बोले कि फिल्म बनाओगे, तो मेरा काम छोड़ के चले जाओगे। मैंने कहा कि नहीं, डायरेक्टर, यूनिट और बाकी टीम काम देखेगी। इसके बाद सिलसिला (गंगोत्री, गंगादेवी, द ग्रेट लीडर) चल पड़ा।
-सूटेड-बूटेड अमितजी का सिर्फ चेहरा, कलाइयां, पंजे दिखते हैं। इससे उनके स्वास्थ्य पर कई लोग संदेह करते हैं?
वह बिल्कुल फिट हैं। दो घंटे एक्सरसाइज करते हैं। एक घंटे योगा करते हैं। उनकी ड्रेस ही ऐसे डिजाइन की जाती है। हां, वह बोटॉक्स नहीं करते। जैसे बाकी लोग स्किन टाइट का इंजेक्शन मार दिया। स्किन क्लीनिंग ट्रीटमेंट ले लिया। उनका बोटॉक्स मैं अपने मेकअप से करता हूं, 50-55 के करीब लेकर आता हूं, जबकि वह 75 के हैं।
-आप शुरू से मेकअप आर्टिस्ट बनना चाहते थे?
मैं इलेक्ट्रीशियन था। लगता था जिंदगी में कुछ बड़ा करूं, तो एक कंपनी में गोडाउन कीपर बन गया। फिर एक फैक्ट्री रिप्रेंजटेेटिव बन। इसके बाद सेल्समैन। कंपनी बंद हुई, तो उसने कहा कि पूना चलो। पिताजी मेकअप आर्टिस्ट थे और मैं इस इंडस्ट्री से नफरत करता था, क्योंकि पिताजी को काम नहीं मिलता था। घर में फाके पड़ते थे। तब मेकअप आर्टिस्ट पर्नसल नहीं होते थे। फिल्म कंपनी में काम करते थे। कंपनी चार महीने या साल भर चलती, फिर छुट्टी। पैसे नहीं होते थे।
-आप कैसे इंडस्ट्री में आए?
नौकरी छूटी, तो पिताजी ने कहा कि एक बार इंडस्ट्री देख लो। मैंने सोचा प्रोडक्शन/डायरेक्शन/कैमरा देखता हूं। पता लगा कि हर डिपार्टमेंट में गाली पड़ती है। तभी राजेश खन्ना को आते देखा। हैंडसम-स्मार्ट हीरो। 'दुश्मन' की शूटिंग थी। वह मेकअप रूम में गए और बाहर निकले, तो ट्रक ड्राइवर बनकर। तब एहसास हुआ कि मेकअप कितनी बड़ी कला है। एक आदमी को दूसरे आदमी में बदल देती है।